लखनऊ। डेढ़ दशक से भी लंबे समय से भाजपा के प्रभाव वाले राज्यों केविधानसभा चुनाव में हार के बाद अब केन्द्र की भाजपा नीति सरकार पर चार माह बाद ही होने वाले लोकसभा-2019 के आम चुनावों से पहले लोकप्रिय नीतियां लागू करने और खामियों को दूर करने का दबाव बढ़ गया है। देश की वित्तीय स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। ऐसे में एनडीए सरकार का कड़े राजकोषीय संसाधनों के बीच लोकलुभावन दिशा में बढ़ना आसान नहीं है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि केन्द्र सरकार को रिजर्व बैंक के रिजर्व का कुछ हिस्सा हासिल करने की दिशा प्रयास करने होंगे। जिससे रिजर्व बैंक के नये नवेले गवर्नर पर भी दबाव बढ़ेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों से इतर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जिन तीन राज्यों में भाजपा हारी है। वहां वह अपने परम्परातगत वोट बचाने में सफल रही है, मगर चार फीसद वह वोट जो विकास, रोजगार, कानून व्यवस्था आदि से प्रभावित होते हैं, उनको अपने पाले में बनाये रखने के लिए भाजपा को अब लोक लुभावन फैसले लेने ही होंगे। वर्ष 2014 में मुख्य विपक्षी रहे कांग्रेस से मुकावले के लिए इस बार भाजपा व एनडीए सरकार को किसान संकट और समेकित संकट से निपटना होगा। तीन हिंदी हार्टलैंड राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को झटका लगा है, उसमें किसान, गरीबों के सवाल ने अहम भूमिका निभायी है। इन परिस्थितियों में केंद्र कृषि ऋण छूट जैसे वादे पर एक कठिन रुख का पालन करने की संभावना है, जिसे कुछ शीर्ष नेतृत्वों द्वारा भी समर्थन दिया जाता है, जो जनवादी देनदारियों के खिलाफ है। हालांकि, अपने ग्रामीण वोट बैंक को वापस जीतने के लिए, पार्टी बड़े पैमाने पर उन योजनाओं पर बैंकिंग कर रही है, जिनकी सरकार ढाई साल के शासनकाल के दौरान शुरू हुई थी। इन योजनाओं में ग्रामीण घरेलू विद्युतीकरण, मुफ्त एलपीजी सिलेंडरों, किफायती आवास और शौचालय योजना शामिल हैं। एनडीए सरकार ने 18 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली को और अधिक आकर्षक बनाया है। केंद्र मूल वेतन का 14 प्रतिशत योगदान देगा, जो पिछले 10 प्रतिशत से चार प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिर से चुनाव के बाद उन्हें पूरा करने के वादे के साथ खाते के वोट में ऐसे अधिक उपाय। अगर रिजर्व बैंक आॅफ इंडी से सरकार के लिए अतिरिक्त रिजर्व से कुछ अतिरिक्त संसाधनों के लिए ढांचा है तो केंद्र कुछ और संसाधन प्राप्त करने के लिए बैंकिंग कर रहा है। लेकिन, यह एक सवार के साथ बैंकों के पुनर्पूंजीकरण से जुड़ा जा सकता है कि इसका इस्तेमाल सरकारी घाटे को पूरा करने के लिए नहीं किया जाएगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 3.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी वचनबद्धता को पहले से ही संकेत दिया है। सूत्रों का कहना है कि केन्द्र सरकार ने लोक लु•ाावन फैसलों की दिशा में मंथन •ाी शुरू कर दिया है। उसका फोकस गांव किसान की ओर हो गया है।
No comments:
Post a Comment