Tuesday, 31 January 2017

Smajwadi party dec-2016


26.12.2016
लखनऊ : समाजवादी परिवार में नए सिरे से रार के पीछे मंत्रियों का टिकट काटने व बचाने की जद्दोजहद एक वजह है। मुख्यमंत्री जहां सभी मंत्रियों को फिर से चुनाव लड़ाना चाहते हैं, वहीं प्रदेश अध्यक्ष कुछ के टिकट काटने की तैयारी में हैं।
 मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले कुछ मंत्रियों के टिकट काटने के पक्षधर थे मगर नोटबंदी के फैसले के बाद सभी मंत्रियों को फिर चुनावी समर में उतारना चाहते हैं, मगर सर्वे का हवाला देकर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव कुछ मंत्रियों के टिकट काटने की तैयारी में हैं। इसमें सपा से निष्कासित होने के बावजूद मंत्री पद पर बरकरार पवन पाण्डेय का नाम सबसे ऊपर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो ऐसे मंत्रियों का टिकट काटने की तैयारी हो गई थी, जिन पर निष्कासित युवा ब्रिगेड के इशारे पर कार्य करने का इल्जाम लगाया जाता है। सूत्रों का कहना है कि परिस्थितियों का भान होने और सियासी लाभ-हानि के विश्लेषण करने के बाद मुख्यमंत्री ने सपा मुखिया को जो लिस्ट सौंपी है, उसमें सभी मंत्रियों का टिकट बरकरार रखा गया गया है।
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 मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड की प्रदेश इकाई घोषित
- अनिल प्रदेश अध्यक्ष, जमील महासचिव नियुक्त
 लखनऊ : मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड की प्रदेश इकाई घोषित कर दी गई है। सपा प्रवक्ता दीपक मिश्र ने बताया कि प्रदेश अयध्क्ष शिवपाल यादव ने अनिल वर्मा को ब्रिगेड का प्रदेश अध्यक्ष और जमील अहमद को महासचिव नियुक्त किया है। अमजद खान 'तमन्ना (बलरामपुर), अमरजीत यादव 'रिंकूÓ(अंबेडकरनगर), मोहित शुक्ल (कानपुर), मो.सद्दाम  (गाजीपुर), राजकुमार सिंह 'राजा (लखनऊ) को उपाध्यक्ष बनाया गया है। विमलेश यादव (उन्नाव) को कोषाध्यक्ष बनाया गया है।  जयराम चपराना (मेरठ), विनोद कुमार यादव (चन्दौली), मयंक पाण्डेय (जालौन), मो. अहमद 'अरशद (लखनऊ), अजय यादव (रायबरेली), मनजीत यादव (कानपुर), जितेन्द्र यादव (गाजियाबाद), विवेक पाण्डेय (अकबरपुर) सिराज खान (लखनऊ), संदीप यदुवंशी (जौनपुर), बीतेन्द्र प्रताप सिंह (उन्नाव), अतुल मिश्र (लखनऊ), इमरान अली (लखीमपुर), अतुल यादव (हमीरपुर), कंवलजीत सिंह (कानपुर), अवनीश यादव (एटा), अंकित यादव (इटावा), अरविंद यादव (देवरिया), मशकूर चौधरी (मुरादाबाद), मधुसूदन यादव (उन्नाव), अजय अवस्थी 'बंटीÓ (लखनऊ), मो. ताहा उर्फ नावेद (फतेहपुर), अनुराग गोस्वामी (मेरठ), शान्ती यादव (शिकोहाबाद), अब्दुल समद उर्फ सद्दाम (इलाहाबाद), रजा खान (उन्नाव), मनोज धानुक (लखनऊ), पंकज पटेल, सिद्धार्थ पाण्डेय (चित्रकूट), सैयद अली (झांसी), शिवेंद्र यादव 'पिन्टूÓ, हरनाम सिंह, ठा. कौशलेन्द्र सिंह, पप्पू यादव (हरदोई), अंबुज शाही (देवरिया) और रमेश वर्मा (अंबेडकरनगर) को सचिव नियुक्त किया गया है।
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सपा से टिकट कटा तो रालोद में शामिल
लखनऊ : समाजवादी पार्टी ने मुजफ्फरनगर के थानाभवन विधानसभा क्षेत्र से शेरसिंह राणा का टिकट काटा तो सोमवार को उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल की सदस्यता ग्रहण की। मीडिया प्रभारी अनिल दुबे ने बताया कि जिला पंचायत सदस्य शेरसिंह राणा के साथ लखनऊ पूर्वी क्षेत्र के वरिष्ठ नेता वीरू पांडेय ने भी समर्थकों के साथ महामंत्री जयंत चौधरी के समक्ष सदस्यता ग्रहण की है। उल्लेखनीय है कि सपा में जारी टिकटों की अदलाबदली के कारण पार्टी छोडऩे का सिलसिला जारी है। राणा से पहले राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त साहब सिंह भी साइकिल की सवारी छोड़ रालोद  का दामन थाम चुके है।
जिलेवार समीक्षा होगी : चुनाव पूर्व संगठन की सक्रियता बढ़ाने के लिए रालोद जिला इकाईयों की सक्रियता बढ़ाएगा। विधानसभा चुनाव लडऩे के इच्छुक जिला अध्यक्षों के स्थान पर कार्यकारी जिलाध्यक्ष की तैनाती पर विचार किया जा रहा है ताकि अन्य सीटों पर संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित न हों।
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मुलायम-शिवपाल बैठक बेनतीजा, युद्ध बढ़ा
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-मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सूची के बाद सपा में बेचैनी
-चुनाव घोषित होने पर सब साफ हो जाएगा : शिवपाल
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लखनऊ : आखिर वही हुआ, जिसका अंदेशा था। समाजवादी पार्टी में टिकट बंटवारे पर शह-मात का दौर फिर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा जारी प्रत्याशियों की सूची पर मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और उनके कोर ग्र्रुप ने सोमवार को पांच घंटे मंथन किया।बाद में शिवपाल ने टिप्पणी की-'चुनाव घोषित होने पर सब साफ हो जाएगा। टिकट बंटवारे में सबकी राय शामिल होगी। नेताजी (मुलायम सिंह) प्रत्याशी घोषित करेंगे।Ó
समाजवादी परिवार में ढाई माह चला महासंग्राम मुलायम सिंह के दखल के बाद थम गया था, मगर यह साफ था कि टिकट बंटवारा शुरू होते ही इसमें फिर उबाल आयेगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कई बार कह चुके थे कि 'विधानसभा चुनाव में इम्तिहान मेरा होना है, इसलिए प्रत्याशी भी मेरी मर्जी के होने चाहिएÓ। इधर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल प्रत्याशी घोषित करते जा रहे थे। 175 प्रत्याशी घोषित होने के बाद सूची में बार-बार बदलाव भी हो रहा था। रविवार को मुख्यमंत्री ने घोषित प्रत्याशियों में से कुछ की क्षेत्र में पकड़ नहीं होने के पत्र के साथ अपनी ओर से प्रत्याशियों की एक सूची भी मुलायम सिंह यादव को भेजी। इससे हड़कंप मच गया और टिकट कटने की आशंका में कई प्रत्याशी देर रात ही लखनऊ पहुंच गये और सोमवार को पूरे दिन सपा प्रदेश कार्यालय व मुलायम सिंह के घर के आसपास मंडराते रहे।
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मुलायम-शिवपाल में बैठक
सोमवार सुबह शिवपाल यादव अपने कोर ग्र्रुप के सदस्य अंबिका चौधरी, नारद राय, ओम प्रकाश सिंह, शादाब फातिमा, गायत्री प्रजापति के साथ विक्रमादित्य मार्ग स्थित मुलायम सिंह के घर पहुंचे जहां उनके बीच पांच घंटे तक मंथन चला। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान मुलायम ने कहा कि अपना पक्ष रखने का हक हर किसी को है, मगर फैसला संसदीय बोर्ड में होगा। जिताऊ-टिकाऊ व वफादार लोगों को वरीयता मिलनी चाहिए। अखिलेश ने जिन प्रत्याशियों को कमजोर माना, उन पर भी चर्चा हुई। आखिर में मुलायम व शिवपाल यादव में तकरीबन 15 मिनट एकांत में बात हुई।
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 अखिलेश के नापंसद प्रत्याशी
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दागियों का न सिर्फ खुलेआम विरोध करते रहे हैं बल्कि वह अमन मणि त्रिपाठी, अतीक अहमद को टिकट देने के पक्ष में भी नहीं हैं। माना जाता है कि मुख्यमंत्री पिंटू राणा, हसनउददीन सिद्दीकी और अयूब को प्रत्याशी बनाने के पक्ष में नहीं हैं।
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इन प्रत्याशियों से असंतुष्ट
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब तक घोषित 175 प्रत्याशियों में से बांदा, मेरठ शहर, सरधना, कानपुर कैंट, मुजफ्फरनगर के मीरापुर, गाजीपुर के मोहम्मदाबाद, , खागा, बिंदकी, नौतनवां, सहजनवां, झांसी, जालौन, वाराणसी की शिवपुर व कैन्ट, फेफना, बागपत, मुरादनगर, अयाहशाह, नरैनी (सुरक्षित), आगरा (दक्षिण), मडि़हान, तिंदवारी, पनियरा, बस्ती समेत दो दर्जन से अधिक सीटों के प्रत्याशियों के अभियान से संतुष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री इन सीटों पर अपनी पसंद के प्रत्याशी चाहते हैं।
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...तो किसने सौंपी सूची
मुख्यमंत्री की सर्वे रिपोर्ट व प्रत्याशियों की सूची मुलायम सिंह यादव को किसने सौंपी? यह सवाल भी दिन भर चर्चा में रहा। कहा जा रहा है रविवार शाम मंत्री आजम खान सूची लेकर मुलायम सिंह के पास गए थे।
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विधायक रामपाल की सपा में वापसी
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-पांच साल में दो बार निकाले जा चुके हैं रामपाल
-सीतापुर जिले के बिसवां विधानसभा क्षेत्र से हैं विधायक
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लखनऊ : अवैध कब्जा, पार्टी विरोधी गतिविधियों के इल्जाम में समाजवादी पार्टी से निष्कासित बिसवां से विधायक रामपाल यादव की दल में फिर वापसी हो गयी है। प्रदेश शिवपाल यादव ने उनका निष्कासन रद कर दिया है। रामपाल पांच साल अंतराल में दो बार निष्कासित हो चुके हैं।
पंचायत चुनाव में पार्टी के घोषित प्रत्याशी के विरुद्ध बगावत करने पर तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें 13 जनवरी को पार्टी से बाहर कर दिया था। उनके साथ विधायक महेन्द्र सिंह उर्फ झीन बाबू, अनूप गुप्ता, राधेश्याम जायसवाल व मनीष रावत को विधान मंडल दल से निलंबित कर दिया गया। जिलाध्यक्ष शमीम कौसर को हटाकर जिला कार्यकारिणी भंग कर दी थी। मगर प्राधिकारी क्षेत्र की विधान परिषद सीटों के चुनाव में रामपाल समेत सभी विधायकों की सपा में वापसी हो गयी। मगर अप्रैल में अचानक एलडीए ने लखनऊ में उनके निर्माण को अवैध ठहराते हुए कार्रवाई शुरू की। सीतापुर में जिला प्रशासन ने उनके होटल को अवैध ठहराया और 29 अप्रैल को लखनऊ पुलिस ने रामपाल यादव को गिरफ्तार करने के साथ उनके निर्माण को जमीदोज कर दिया था। शिवपाल यादव के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद रामपाल यादव की सपा के दरवाजे फिर खुल गए। पहले उनके समर्थक को जिलाध्यक्ष बनाया गया और अब सोमवार को शिवपाल यादव ने रामपाल यादव को पार्टी में वापस लेने की घोषणा की। सपा प्रवक्ता दीपक मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर रामपाल को वापस सपा में लिया गया है।
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बुंदेलखंड में कल दौड़ेगा अखिलेश का विकास रथ
- महोबा ही गए।
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लखनऊ : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का विकास रथ 28 दिसंबर को बुंदेलखंड में दौड़ेगा। महोबा जिले के पनवाड़ी ब्लाक का बेंदव गांव में सौर ऊर्जा के दो प्लांटों का भी मुख्यमंत्री लोकार्पण करेंगे।
गत तीन नवंबर को विकास रथ यात्रा आरंभ करने के बाद मुख्यमंत्री ने अब बुंदेलखंड की ओर रूख किया है। 28 दिसंबर को महोबा की सड़कों पर रथ दौड़ेगा। बुंदेलखंड में सियासी जमीन मजबूत करने में जुटे मुख्यमंत्री अपने ड्रीम प्रोजेक्ट सौर ऊर्जा प्लांट का भी लोकार्पण करेंगे। स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे है। चुनावी नजरिए से भी मुख्यमंत्री का महोबा दौरा काफी अहम माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी की मजबूती के लिए अखिलेश बुंदेलखंड में विकास को मुद्दा बना कर चुनावी जंग में उतरना चाहते है। जानकारों का कहना है कि बुंदेलखंड की मजबूती के लिए अखिलेश यादव यहां की किसी सीट से चुनाव भी लड़ सकते है। बता दे कि बुंदेलखंड में ज्यादातर सीटों पर पर सपा व बसपा का कब्जा रहा है लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर से यहां कमल ही खिल सका था।
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