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जारी की अपनी सूची, सपा विभाजन के मुहाने पर
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-मुख्यमंत्री ने नकारी शिवपाल की लिस्ट, गेंद मुलायम के पाले में
-अखिलेश और शिवपाल की सूची में 195 नाम कॉमन
-रात 12 बजे शिवपाल ने 68 उम्मीदवारों की नई लिस्ट जारी की
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लखनऊ : समाजवादी परिवार का चार माह पुराना संग्राम अब निर्णायक मोड़ पर है। बुधवार को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा जारी 325 प्रत्याशियों की सूची को नकारते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को 235 प्रत्याशियों की अपनी सूची जारी कर दी। पिता की छाया से निकलने की छटपटाहट में हुई अखिलेश की इस बगावत के बाद लड़ाई अब ऐसे मोड़ पर है, जहां फैसला मुलायम को लेना है। वह या तो अखिलेश की मानें या बुधवार को कही गई अपनी उस बात पर अडिग रहें कि 'प्रत्याशियों में कोई बदलाव नहीं होगा।Ó उधर रात करीब 12 बजे शिवपाल ने बचे हुए पार्टी प्रत्याशियों की नई सूची ट्विटर पर जारी कर दी। अब सपा के अधिकृत प्रत्याशियों की संख्या 393 हो गई है।
अखिलेश की सूची में 171 विधायकों को टिकट दिया गया है। 64 ऐसे क्षेत्रों के प्रत्याशी भी घोषित किए गए हैं, जहां पार्टी 2012 में हार गई थी। अखिलेश की सूची में उन तीन मंत्रियों रामगोविंद चौधरी, अरविंद सिंह गोप और पवन पाण्डेय को भी टिकट मिला है जिनके नाम शिवपाल की सूची में नहीं थे। इसी तरह अखिलेश ने अपने छोटे भाई की पत्नी अपर्णा यादव को भी टिकट नहीं दिया है। मुलायम की 325 और अखिलेश की 235 उम्मीदवारों की सूची में 195 नाम समान हैं। समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई के ताजा अध्याय में बुधवार को मुलायम मुख्यमंत्री के समर्थकों के टिकट काट दिए थे। इससे भड़के अखिलेश ने पहले शिवपाल यादव की करीबी सुरभि शुक्ला को आवास विकास व उनके पति डॉ. संदीप शुक्ला को निर्माण निगम के सलाहकार पद से बर्खास्त कर दिया और फिर गुरुवार को सुबह 11 बजे विधायकों को अपने सरकारी आवास पर बुलाया। उनसे फौरी चर्चा के बाद वह सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह के विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पहुंचे। यहां मुलायम, अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच करीब दो घंटे चर्चा हुई, जिसमें मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, विधायकों का टिकट काटे जाने पर आपत्ति जाहिर की मगर बात नहीं बनी। यहां बिफरे मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपनी अलग सूची जारी करेंगे।
सपा अध्यक्ष के घर से निकलकर मुख्यमंत्री, पांच कालिदास मार्ग के करीब जनसुनवाई भवन में इंतजार कर रहे विधायकों के पास पहुंचे और टिकट कटने को लेकर उन्हें तसल्ली दी। उनकी राय पूछी और कहा कि सब तैयारी करें, सबको लड़ाया जाएगा। विधायकों ने भी कहा कि अखिलेश अपने नए सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। देर शाम बिना किसी लेटरहेड के प्रेसनोट जारी कर 171 विधायकों के साथ ही 64 उन क्षेत्रों के प्रत्याशी घोषित करने की जानकारी दी गई जहां 2012 में पार्टी प्रत्याशी हार गए थे। यह भी कहा गया कि शेष प्रत्याशी शीघ्र घोषित होंगे।
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मुलायम ने शिवपाल को दोबारा बुलाया
अखिलेश की सूची जारी होने से दबाव में आए मुलायम ने शाम को प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को फिर अपने घर बुलाया। सूत्रों का कहना है कि कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने की राय बनी मगर उससे पहले ही मुख्यमंत्री की सूची जारी हो गई। मुलायम ने रात तकरीबन 10.20 बजे शिवपाल को फिर अपने घर बुलाया जो उनके पास से करीब 11.15 बजे निकले। इस बीच प्रतिदिन की तरह अखिलेश भी लगभग 9.45 बजे पांच कालिदास मार्ग से पांच विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे गए। ध्यान रहे, मुख्यमंत्री रात में जिस विक्रमादित्य मार्ग वाले बंगले में रहते हैं वहीं मुलायम सिंह यादव भी रहते हैं।
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कौन क्या बोला
किसी भी तरह सरकार बनानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में जाओ और तैयारी करो। टिकट मिलेगा तो ठीक नहीं तो देखा जाएगा। अखिलेश को फिर मुख्यमंत्री बनाना है।
-बृजलाल सोनकर, विधायक मेंहनगर
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-मुख्यमंत्री जो भी कहेंगे, हम करेंगे। स्थितियां जल्दी सामान्य होंगी।
-मनीष रावत, विधायक सिंधौली
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-समर्थकों, विधायकों ने एक सुर से कहा कि जनता, कार्यकर्ता आपके साथ हैं, निर्णय लीजिए। मैं तो अखिलेशजी के लिए कहता हूं कि 'का चुप साध रहा बलवानाÓ
- उदयवीर सिंह, एमएलसी (सपा से बर्खास्त हैं)
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जीतने वालों को ही टिकट दिया जाता है, टिकट का फैसला पार्टी का नेतृत्व करता है।
-बेनी प्रसाद वर्मा, राज्यसभा सदस्य
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195 प्रत्याशियों के सामने हो सकता है असमंजस
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- मुलायम और अखिलेश की सूची में 195 उम्मीदवार कॉमन
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : बुधवार को सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और गुरुवार की शाम अखिलेश यादव की प्रत्याशियों की सूची में 195 नाम कॉमन हैं। ऐसे में अगर बगावती तेवर अख्तियार किए अखिलेश यादव ने सपा से अलग कोई पाला खींचा तो दोनों ओर से घोषित प्रत्याशियों के सामने चुनावी मैदान से ज्यादा बड़ी चुनौती पाला तय करने की होगी। इनमें जो अखिलेश के साथ जाएगा, वह 'साइकिलÓ चिन्ह से वंचित हो सकता है। मुलायम के साथ खड़े रहने पर अखिलेश के साथ वफादारी सवालों के घेरे में होगी।
चौबीस घंटों के अंतराल में समाजवादी पार्टी के दो धड़ों ने दो सूचियां जारी की। पहले मुलायम की ओर से जारी प्रत्याशियों में 393 प्रत्याशियों की सूची जारी की फिर अखिलेश ने 235 प्रत्याशी घोषित किए। इसमें खास बात यह है कि इसमें 195 लोग ऐसे हैं, जिन्हें दोनों ने प्रत्याशी बनाया है। विश्लेषकों का कहना है कि दोनों अपनी सूची में डटे रहते हैं और अखिलेश किसी संभावित गठबंधन के साथ चुनाव में जाते हैं तो उनकी दुश्वारी होगी जिनका नाम दोनों की सूची में है। दरअसल, चुनाव आयोग का नियम है कि पार्टी का चिन्ह हासिल करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष या उसके द्वारा जारी फार्म ए व बी चुनाव आयोग में जमा करना अनिवार्य होता है। इसकेअभाव में प्रत्याशी निर्दल माना जाता है। आयोग उपलब्ध निशानों में एक आवंटित करता है। सपा सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों का दोनों सूची में नाम है, वह अब भी परिवार में सब कुछ ठीक हो जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
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सपा ने लखनऊ के दो विधायकों के टिकट काटे
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- बक्शी का तालाब से राजेंद्र यादव व मलिहाबाद से सोनू कनौजिया को टिकट
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लखनऊ : सपा ने लखनऊ के अपने दो विधायकों को अबकी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया है। लखनऊ में सपा के सात विधायक हैैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने प्रत्याशियों की जो सूची जारी की है, उसमें बक्शी का तालाब और मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायकों का नाम गायब है।पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने लखनऊ की नौ में से सात सीटों पर कब्जा किया था। इस बार पार्टी के रणनीतिकार बाकी सीटों पर तो मौजूदा विधायकों को दोहराने की तैयारी में है, लेकिन बक्शी का तालाब विधान सभा क्षेत्र से विधायक गोमती यादव और मलिहाबाद विधान सभा क्षेत्र से विधायक इंदल रावत को इस बार मौका मिलता नहीं दिख रहा है। सूत्र बताते हैैं कि पांच साल के कार्यकाल की समीक्षा में इन विधायकों के काम से पार्टी संतुष्ट नहीं है। गोमती यादव पर भाजपा का बैकग्राउंड भारी पड़ रहा है तो इंदल रावत परफॉरमेंस के मामले में पिछड़ गए हैैं। गोमती यादव पहले भाजपा से विधायक रह चुके हैैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की ओर से जारी सूची के मुताबिक पूर्व विधायक राजेंद्र यादव को बक्शी का तालाब से और सोनू कनौजिया को मलिहाबाद से प्रत्याशी बनाया गया है।
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अखिलेश की लिस्ट में अपर्णा नहीं
एक दिन पहले शिवपाल सिंह यादव ने प्रत्याशियों की जो सूची जारी की थी, उसमें पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव का नाम लखनऊ के कैंट विधान सभा क्षेत्र की उम्मीदवार के तौर पर शामिल था, लेकिन गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 235 प्रत्याशियों की जो पहली सूची जारी की है, उसमें कैंट विधान सभा क्षेत्र से किसी को तय नहीं किया गया है।
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लखनऊ : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की 235 उम्मीदवारों की पहली सूची में 46 मुस्लिमों को स्थान मिल सका है। संसदीय कार्यमंत्री आजम खां के साथ उनके पुत्र अब्दुला आजम को जगह मिली परंतु कैबिनेट मंत्री महबूब अली स्थान नहीं पा सके।
शिवपाल की सूची में 87 मुस्लिम : उधर सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव द्वारा गुरुवार को जारी की दूसरी सूची में 16 मुस्लिम उम्मीदवारों को जगह मिली। बुधवार को पहली सूची में 71 मुसलमान प्रत्याशी शामिल थे। अभी दस सीटों पर शिवपाल सिंह को उम्मीदवार अभी घोषित करने है।
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लखनऊ : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा जारी प्रत्याशियों की पहली सूची में दागियों से दामन बचाने की कोशिश की गई है। सारा हत्याकांड में फंसे अमनमणि त्रिपाठी का टिकट काट कर महाराजगंज की नौतनवां सीट से कांग्रेस से आए विधायक कौशलेंद्र सिंह को टिकट थमा दिया। अखिलेश की सूची में अंबिका चौधरी को स्थान नहीं मिल पाना भी चर्चा का मुद्दा बना है। कौमी एकता दल के मुख्तार अंसारी और उनके भाई सिबगतुल्ला अंसारी भी मुख्यमंत्री की सूची में स्थान न पा सके जबकि बुधवार को मुलायम सिंह यादव की सूची में सिबगतुल्ला का नाम दर्ज था। अखिलेश की सूची में अतीक का नाम भी नहीं है।
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कांग्रेस को लेकर अखिलेश नरम
लखनऊ : कांग्रेस से दोस्ती को लेकर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव भले ही कठोर बने हो लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नरमी बरती। गुरुवार को जारी 235 उम्मीदवारों की सूची में कांग्रेस के प्रभाव वाली अधिकतर सीटों को खाली रखा है। विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर, अखिलेश प्रताप सिंह, अनुग्रह नारायण, नदीम जावेद, आराधना मिश्रा मोना, गजराज सिंह, बंशी पहाडिय़ा, अजय राय व अजय कुमार लल्लू जैसे विधायकों की सीट पर कोई उम्मीदवार पहली सूची में नहीं उतारा है। हालांकि देवबंद से माविया अली और शामली से पंकज मलिक की सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए है। अखिलेश ने कांग्रेस के बागियों को भी टिकट थमा दिया है। बहराइच जिले में पयागपुर क्षेत्र से मुकेश श्रीवास्तव और महाराजगंज की नौतनवां विधानसभा सीट से कौशलेंद्र सिंह मुन्ना प्रत्याशी घोषित किए है। बता दे कि कांग्रेस से गठबंधन करने को लेकर अखिलेश के रुख में नरमी उनके बयानों में दिखती रही है। कांग्रेस से गठबंधन कर तीन सौ सीटें जीतने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री के अगले कदम पर सबकी निगाहें लगी है।
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मैनपुरी में टिकट कटने से नाराज समर्थकों ने फूंके पुतले
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- बुलंदशहर में अद्र्धनग्न होकर जुलूस निकाला
- कन्नौज में पार्टी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी
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लखनऊ : सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को विधानसभा चुनाव के लिए 325 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें जिन प्रत्याशियों का नाम कटा, उनके समर्थकों ने गुरुवार को सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जताया। सपा के गढ़ मैनपुरी में भोगांव से शिवबक्श को प्रत्याशी बनाने पर मौजूदा विधायक आलोक शाक्य के समर्थकों ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। प्रत्याशी के पुतले फूंके। इसी तरह से किशनी सीट पर संध्या कठेरिया को टिकट देने पर मौजूदा विधायक ब्रजेश कठेरिया के समर्थन में लोगों ने पुतले फूंके।
आगरा, फीरोजाबाद, एटा, कासगंज, मथुरा में कोई प्रदर्शन नहीं हुआ। आगरा में छावनी सीट से सपा प्रत्याशी चंद्रसेन टपलू की हार्टअटैक से मौत हो जाने से सपा खेमा शोक में डूबा हुआ है। बुलंदशहर में सदर सीट से सपा प्रत्याशी मुस्तकीम अल्वी का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने अद्र्धनग्न होकर शहर में जुलूस निकाला। जिलाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गंभीर आरोप लगाए। सपा कार्यालय पर कुर्सियां फेंकी। सपा ने सदर सीट से प्रत्याशी मुस्तकीम अल्वी का टिकट काटकर शुजात आलम को दे दिया। बुधवार रात को मुस्तकीम अल्वी के समर्थकों ने सपा कार्यालय पर हंगामा किया था और जिलाध्यक्ष के पोस्टर व बैनर फाड़ दिए थे।
उधर, गाजियाबाद के लोनी में ईश्वर मावी का टिकट कटने से नाराज समर्थकों ने लोनी तिराहे पर जाम लगा दिया। नारेबाजी की और मावी को टिकट दिए जाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके जैसा मजबूत उम्मीदवार सपा के पास लोनी में कोई नहीं है। समर्थकों ने राशिद मलिक के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समर्थकों को समझा-बुझाकर शांत किया और जाम खुलवाया। समर्थकों ने बुधवार देर रात भी दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर जाम लगाकर हंगामा किया था और नारेबाजी की थी।
टिकट वितरण को लेकर हो रहे घमासान में मध्य यूपी व बुंदेलखंड के लगभग सभी जिलों में शांति देखी जा रही है। पार्टी के कुछ विरोधी सक्रिय जरूर हुए हैं किंतु अभी कोई पुरजोर विरोध नही कर रहा है। कन्नौज में कुछ हलचल देखी गई। तिर्वा या छिबरामऊ से टिकट की मंशा रखने वाले नवाब सिंह यादव समर्थक पार्टी थिंक टैंक के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। नवाब के समर्थक तिर्वा रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर एकजुट हुए। यहां से एक सैकड़ा कारों के जरिये काफिला लखनऊ के लिए रवाना हुआ।
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क्या हमीरपुर को मुख्यमंत्री के लिए तैयार किया गया!
- आंध्र प्रदेश से आयी टोली बुंदेलखंड में दो साल से कर रही काम
- 700 किसानों का समूह बना, अन्ना प्रथा खत्म करने का अभियान
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लखनऊ : टिकट पर रार है। बागवती सुर तेज हैं मगर यह सवाल भी तैर रहा है किमुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए बुंदेलखंड में कोई विधानसभा सीट तैयार करायी गई है क्या? प्रदेश के अनुपूरक बजट में जैविक खेती को धन, चुनौती बनी 'अन्ना प्रथाÓ रोकने के लिए आंध ्रप्रदेश की एक टोली की इस क्षेत्र में सक्रियता का संकेत शायद यही है।
सूत्रों के अनुसार, सत्ता में आने के दो साल बाद यानी 2014 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड में सियासी जमीन तलाशनी शुरू की। इसके लिए आंध्र प्रदेश निवासी जगदीश यादव को हमीरपुर में मुस्तैद किया गया। ताइवान से जैविक खेती का प्रशिक्षण ले चुके इस युवक को संसाधन मुहैया कराये गये। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 7000 किसानों का समूह बनाने का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। फिर वर्ष 2015-16 के अनुपूरक बजट में हमीरपुर में जैविक खेती के लिए दो करोड़ रुपये आवंटित किये गये। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री की हिदायत पर ही आंध्र प्रदेश की इस टोली ने हमीरपुर के सात व बांदा केआठ ब्लाकों में 'अन्ना प्रथाÓ खत्म करने का अभियान शुरू किया। बुंदेलखंड में सूखा, पानी के साथ सबसे बड़ी समस्या अन्ना प्रथा ही है। इसमें गर्मियों की शुरूआत से पहले मवेशियों को छोड़ दिया जाता था। अगली फसल के पहले तक वे खुले घूमते थे फिर लोग उन्हें घरों में बांध लेते थे। लगातार सूखा पडऩे के बाद प्रथा ने विस्तार लिया और अब जानवर पूरे समय खुले रहते हैं। माना जाता है कि इस प्रथा के प्रति जागरूकता के जरिये अखिलेश बुंदेलखंड में अपना जनाधार तैयार करने में जुटे थे क्योंकि जागरूकता अभियान में भी अखिलेश को प्रोजेक्ट किया जा रहा था। इससे इतर हमीरपुर में रिश्तेदारी और वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री के तीन बार बुंदेलखंड के दौरे को भी उनके चुनावी जमीन तैयार करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक पखवारे पहले लखनऊ में एक टीवी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खुद राजफाश किया कि हमीरपुर की जिला इकाई ने अखिलेश चुनाव लडऩे का प्रस्ताव भेजा है। मैं भी उस क्षेत्र से चुनाव लडऩे को इच्छुक हूं, प्रस्ताव सपा अध्यक्ष के पास भेजा दिया है। इसके बाग मुख्यमंत्री के बुंदेलखंड से चुनाव लडऩे की चर्चा ने जोर पकड़ा। हालांकि जिन सीटों पर उनके चुनाव लडऩे की चर्चा थी, उस पर प्रत्याशी घोषित हो गये हैं। कहा यह भी जा रहा है कि हमीरपुर से सटे लहुरीमऊ गांव में किसान आंदोलन व भाकियू के आक्रमक रवैये का भी मुख्यमंत्री का कोर ग्र्रुप अध्ययन कर रहा है।
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जारी की अपनी सूची, सपा विभाजन के मुहाने पर
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-मुख्यमंत्री ने नकारी शिवपाल की लिस्ट, गेंद मुलायम के पाले में
-अखिलेश और शिवपाल की सूची में 195 नाम कॉमन
-रात 12 बजे शिवपाल ने 68 उम्मीदवारों की नई लिस्ट जारी की
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लखनऊ : समाजवादी परिवार का चार माह पुराना संग्राम अब निर्णायक मोड़ पर है। बुधवार को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव द्वारा जारी 325 प्रत्याशियों की सूची को नकारते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को 235 प्रत्याशियों की अपनी सूची जारी कर दी। पिता की छाया से निकलने की छटपटाहट में हुई अखिलेश की इस बगावत के बाद लड़ाई अब ऐसे मोड़ पर है, जहां फैसला मुलायम को लेना है। वह या तो अखिलेश की मानें या बुधवार को कही गई अपनी उस बात पर अडिग रहें कि 'प्रत्याशियों में कोई बदलाव नहीं होगा।Ó उधर रात करीब 12 बजे शिवपाल ने बचे हुए पार्टी प्रत्याशियों की नई सूची ट्विटर पर जारी कर दी। अब सपा के अधिकृत प्रत्याशियों की संख्या 393 हो गई है।
अखिलेश की सूची में 171 विधायकों को टिकट दिया गया है। 64 ऐसे क्षेत्रों के प्रत्याशी भी घोषित किए गए हैं, जहां पार्टी 2012 में हार गई थी। अखिलेश की सूची में उन तीन मंत्रियों रामगोविंद चौधरी, अरविंद सिंह गोप और पवन पाण्डेय को भी टिकट मिला है जिनके नाम शिवपाल की सूची में नहीं थे। इसी तरह अखिलेश ने अपने छोटे भाई की पत्नी अपर्णा यादव को भी टिकट नहीं दिया है। मुलायम की 325 और अखिलेश की 235 उम्मीदवारों की सूची में 195 नाम समान हैं। समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई के ताजा अध्याय में बुधवार को मुलायम मुख्यमंत्री के समर्थकों के टिकट काट दिए थे। इससे भड़के अखिलेश ने पहले शिवपाल यादव की करीबी सुरभि शुक्ला को आवास विकास व उनके पति डॉ. संदीप शुक्ला को निर्माण निगम के सलाहकार पद से बर्खास्त कर दिया और फिर गुरुवार को सुबह 11 बजे विधायकों को अपने सरकारी आवास पर बुलाया। उनसे फौरी चर्चा के बाद वह सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह के विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पहुंचे। यहां मुलायम, अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच करीब दो घंटे चर्चा हुई, जिसमें मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, विधायकों का टिकट काटे जाने पर आपत्ति जाहिर की मगर बात नहीं बनी। यहां बिफरे मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपनी अलग सूची जारी करेंगे।
सपा अध्यक्ष के घर से निकलकर मुख्यमंत्री, पांच कालिदास मार्ग के करीब जनसुनवाई भवन में इंतजार कर रहे विधायकों के पास पहुंचे और टिकट कटने को लेकर उन्हें तसल्ली दी। उनकी राय पूछी और कहा कि सब तैयारी करें, सबको लड़ाया जाएगा। विधायकों ने भी कहा कि अखिलेश अपने नए सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। देर शाम बिना किसी लेटरहेड के प्रेसनोट जारी कर 171 विधायकों के साथ ही 64 उन क्षेत्रों के प्रत्याशी घोषित करने की जानकारी दी गई जहां 2012 में पार्टी प्रत्याशी हार गए थे। यह भी कहा गया कि शेष प्रत्याशी शीघ्र घोषित होंगे।
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मुलायम ने शिवपाल को दोबारा बुलाया
अखिलेश की सूची जारी होने से दबाव में आए मुलायम ने शाम को प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को फिर अपने घर बुलाया। सूत्रों का कहना है कि कुछ सीटों पर प्रत्याशी बदलने की राय बनी मगर उससे पहले ही मुख्यमंत्री की सूची जारी हो गई। मुलायम ने रात तकरीबन 10.20 बजे शिवपाल को फिर अपने घर बुलाया जो उनके पास से करीब 11.15 बजे निकले। इस बीच प्रतिदिन की तरह अखिलेश भी लगभग 9.45 बजे पांच कालिदास मार्ग से पांच विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे गए। ध्यान रहे, मुख्यमंत्री रात में जिस विक्रमादित्य मार्ग वाले बंगले में रहते हैं वहीं मुलायम सिंह यादव भी रहते हैं।
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कौन क्या बोला
किसी भी तरह सरकार बनानी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में जाओ और तैयारी करो। टिकट मिलेगा तो ठीक नहीं तो देखा जाएगा। अखिलेश को फिर मुख्यमंत्री बनाना है।
-बृजलाल सोनकर, विधायक मेंहनगर
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-मुख्यमंत्री जो भी कहेंगे, हम करेंगे। स्थितियां जल्दी सामान्य होंगी।
-मनीष रावत, विधायक सिंधौली
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-समर्थकों, विधायकों ने एक सुर से कहा कि जनता, कार्यकर्ता आपके साथ हैं, निर्णय लीजिए। मैं तो अखिलेशजी के लिए कहता हूं कि 'का चुप साध रहा बलवानाÓ
- उदयवीर सिंह, एमएलसी (सपा से बर्खास्त हैं)
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जीतने वालों को ही टिकट दिया जाता है, टिकट का फैसला पार्टी का नेतृत्व करता है।
-बेनी प्रसाद वर्मा, राज्यसभा सदस्य
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195 प्रत्याशियों के सामने हो सकता है असमंजस
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- मुलायम और अखिलेश की सूची में 195 उम्मीदवार कॉमन
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ : बुधवार को सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और गुरुवार की शाम अखिलेश यादव की प्रत्याशियों की सूची में 195 नाम कॉमन हैं। ऐसे में अगर बगावती तेवर अख्तियार किए अखिलेश यादव ने सपा से अलग कोई पाला खींचा तो दोनों ओर से घोषित प्रत्याशियों के सामने चुनावी मैदान से ज्यादा बड़ी चुनौती पाला तय करने की होगी। इनमें जो अखिलेश के साथ जाएगा, वह 'साइकिलÓ चिन्ह से वंचित हो सकता है। मुलायम के साथ खड़े रहने पर अखिलेश के साथ वफादारी सवालों के घेरे में होगी।
चौबीस घंटों के अंतराल में समाजवादी पार्टी के दो धड़ों ने दो सूचियां जारी की। पहले मुलायम की ओर से जारी प्रत्याशियों में 393 प्रत्याशियों की सूची जारी की फिर अखिलेश ने 235 प्रत्याशी घोषित किए। इसमें खास बात यह है कि इसमें 195 लोग ऐसे हैं, जिन्हें दोनों ने प्रत्याशी बनाया है। विश्लेषकों का कहना है कि दोनों अपनी सूची में डटे रहते हैं और अखिलेश किसी संभावित गठबंधन के साथ चुनाव में जाते हैं तो उनकी दुश्वारी होगी जिनका नाम दोनों की सूची में है। दरअसल, चुनाव आयोग का नियम है कि पार्टी का चिन्ह हासिल करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष या उसके द्वारा जारी फार्म ए व बी चुनाव आयोग में जमा करना अनिवार्य होता है। इसकेअभाव में प्रत्याशी निर्दल माना जाता है। आयोग उपलब्ध निशानों में एक आवंटित करता है। सपा सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों का दोनों सूची में नाम है, वह अब भी परिवार में सब कुछ ठीक हो जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
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सपा ने लखनऊ के दो विधायकों के टिकट काटे
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- बक्शी का तालाब से राजेंद्र यादव व मलिहाबाद से सोनू कनौजिया को टिकट
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लखनऊ : सपा ने लखनऊ के अपने दो विधायकों को अबकी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया है। लखनऊ में सपा के सात विधायक हैैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने प्रत्याशियों की जो सूची जारी की है, उसमें बक्शी का तालाब और मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायकों का नाम गायब है।पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने लखनऊ की नौ में से सात सीटों पर कब्जा किया था। इस बार पार्टी के रणनीतिकार बाकी सीटों पर तो मौजूदा विधायकों को दोहराने की तैयारी में है, लेकिन बक्शी का तालाब विधान सभा क्षेत्र से विधायक गोमती यादव और मलिहाबाद विधान सभा क्षेत्र से विधायक इंदल रावत को इस बार मौका मिलता नहीं दिख रहा है। सूत्र बताते हैैं कि पांच साल के कार्यकाल की समीक्षा में इन विधायकों के काम से पार्टी संतुष्ट नहीं है। गोमती यादव पर भाजपा का बैकग्राउंड भारी पड़ रहा है तो इंदल रावत परफॉरमेंस के मामले में पिछड़ गए हैैं। गोमती यादव पहले भाजपा से विधायक रह चुके हैैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की ओर से जारी सूची के मुताबिक पूर्व विधायक राजेंद्र यादव को बक्शी का तालाब से और सोनू कनौजिया को मलिहाबाद से प्रत्याशी बनाया गया है।
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अखिलेश की लिस्ट में अपर्णा नहीं
एक दिन पहले शिवपाल सिंह यादव ने प्रत्याशियों की जो सूची जारी की थी, उसमें पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव का नाम लखनऊ के कैंट विधान सभा क्षेत्र की उम्मीदवार के तौर पर शामिल था, लेकिन गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 235 प्रत्याशियों की जो पहली सूची जारी की है, उसमें कैंट विधान सभा क्षेत्र से किसी को तय नहीं किया गया है।
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लखनऊ : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की 235 उम्मीदवारों की पहली सूची में 46 मुस्लिमों को स्थान मिल सका है। संसदीय कार्यमंत्री आजम खां के साथ उनके पुत्र अब्दुला आजम को जगह मिली परंतु कैबिनेट मंत्री महबूब अली स्थान नहीं पा सके।
शिवपाल की सूची में 87 मुस्लिम : उधर सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव द्वारा गुरुवार को जारी की दूसरी सूची में 16 मुस्लिम उम्मीदवारों को जगह मिली। बुधवार को पहली सूची में 71 मुसलमान प्रत्याशी शामिल थे। अभी दस सीटों पर शिवपाल सिंह को उम्मीदवार अभी घोषित करने है।
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लखनऊ : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा जारी प्रत्याशियों की पहली सूची में दागियों से दामन बचाने की कोशिश की गई है। सारा हत्याकांड में फंसे अमनमणि त्रिपाठी का टिकट काट कर महाराजगंज की नौतनवां सीट से कांग्रेस से आए विधायक कौशलेंद्र सिंह को टिकट थमा दिया। अखिलेश की सूची में अंबिका चौधरी को स्थान नहीं मिल पाना भी चर्चा का मुद्दा बना है। कौमी एकता दल के मुख्तार अंसारी और उनके भाई सिबगतुल्ला अंसारी भी मुख्यमंत्री की सूची में स्थान न पा सके जबकि बुधवार को मुलायम सिंह यादव की सूची में सिबगतुल्ला का नाम दर्ज था। अखिलेश की सूची में अतीक का नाम भी नहीं है।
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कांग्रेस को लेकर अखिलेश नरम
लखनऊ : कांग्रेस से दोस्ती को लेकर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव भले ही कठोर बने हो लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नरमी बरती। गुरुवार को जारी 235 उम्मीदवारों की सूची में कांग्रेस के प्रभाव वाली अधिकतर सीटों को खाली रखा है। विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर, अखिलेश प्रताप सिंह, अनुग्रह नारायण, नदीम जावेद, आराधना मिश्रा मोना, गजराज सिंह, बंशी पहाडिय़ा, अजय राय व अजय कुमार लल्लू जैसे विधायकों की सीट पर कोई उम्मीदवार पहली सूची में नहीं उतारा है। हालांकि देवबंद से माविया अली और शामली से पंकज मलिक की सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए है। अखिलेश ने कांग्रेस के बागियों को भी टिकट थमा दिया है। बहराइच जिले में पयागपुर क्षेत्र से मुकेश श्रीवास्तव और महाराजगंज की नौतनवां विधानसभा सीट से कौशलेंद्र सिंह मुन्ना प्रत्याशी घोषित किए है। बता दे कि कांग्रेस से गठबंधन करने को लेकर अखिलेश के रुख में नरमी उनके बयानों में दिखती रही है। कांग्रेस से गठबंधन कर तीन सौ सीटें जीतने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री के अगले कदम पर सबकी निगाहें लगी है।
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मैनपुरी में टिकट कटने से नाराज समर्थकों ने फूंके पुतले
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- बुलंदशहर में अद्र्धनग्न होकर जुलूस निकाला
- कन्नौज में पार्टी नेताओं के खिलाफ नारेबाजी
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लखनऊ : सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को विधानसभा चुनाव के लिए 325 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसमें जिन प्रत्याशियों का नाम कटा, उनके समर्थकों ने गुरुवार को सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जताया। सपा के गढ़ मैनपुरी में भोगांव से शिवबक्श को प्रत्याशी बनाने पर मौजूदा विधायक आलोक शाक्य के समर्थकों ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। प्रत्याशी के पुतले फूंके। इसी तरह से किशनी सीट पर संध्या कठेरिया को टिकट देने पर मौजूदा विधायक ब्रजेश कठेरिया के समर्थन में लोगों ने पुतले फूंके।
आगरा, फीरोजाबाद, एटा, कासगंज, मथुरा में कोई प्रदर्शन नहीं हुआ। आगरा में छावनी सीट से सपा प्रत्याशी चंद्रसेन टपलू की हार्टअटैक से मौत हो जाने से सपा खेमा शोक में डूबा हुआ है। बुलंदशहर में सदर सीट से सपा प्रत्याशी मुस्तकीम अल्वी का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने अद्र्धनग्न होकर शहर में जुलूस निकाला। जिलाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गंभीर आरोप लगाए। सपा कार्यालय पर कुर्सियां फेंकी। सपा ने सदर सीट से प्रत्याशी मुस्तकीम अल्वी का टिकट काटकर शुजात आलम को दे दिया। बुधवार रात को मुस्तकीम अल्वी के समर्थकों ने सपा कार्यालय पर हंगामा किया था और जिलाध्यक्ष के पोस्टर व बैनर फाड़ दिए थे।
उधर, गाजियाबाद के लोनी में ईश्वर मावी का टिकट कटने से नाराज समर्थकों ने लोनी तिराहे पर जाम लगा दिया। नारेबाजी की और मावी को टिकट दिए जाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनके जैसा मजबूत उम्मीदवार सपा के पास लोनी में कोई नहीं है। समर्थकों ने राशिद मलिक के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समर्थकों को समझा-बुझाकर शांत किया और जाम खुलवाया। समर्थकों ने बुधवार देर रात भी दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर जाम लगाकर हंगामा किया था और नारेबाजी की थी।
टिकट वितरण को लेकर हो रहे घमासान में मध्य यूपी व बुंदेलखंड के लगभग सभी जिलों में शांति देखी जा रही है। पार्टी के कुछ विरोधी सक्रिय जरूर हुए हैं किंतु अभी कोई पुरजोर विरोध नही कर रहा है। कन्नौज में कुछ हलचल देखी गई। तिर्वा या छिबरामऊ से टिकट की मंशा रखने वाले नवाब सिंह यादव समर्थक पार्टी थिंक टैंक के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। नवाब के समर्थक तिर्वा रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर एकजुट हुए। यहां से एक सैकड़ा कारों के जरिये काफिला लखनऊ के लिए रवाना हुआ।
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क्या हमीरपुर को मुख्यमंत्री के लिए तैयार किया गया!
- आंध्र प्रदेश से आयी टोली बुंदेलखंड में दो साल से कर रही काम
- 700 किसानों का समूह बना, अन्ना प्रथा खत्म करने का अभियान
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लखनऊ : टिकट पर रार है। बागवती सुर तेज हैं मगर यह सवाल भी तैर रहा है किमुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए बुंदेलखंड में कोई विधानसभा सीट तैयार करायी गई है क्या? प्रदेश के अनुपूरक बजट में जैविक खेती को धन, चुनौती बनी 'अन्ना प्रथाÓ रोकने के लिए आंध ्रप्रदेश की एक टोली की इस क्षेत्र में सक्रियता का संकेत शायद यही है।
सूत्रों के अनुसार, सत्ता में आने के दो साल बाद यानी 2014 में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड में सियासी जमीन तलाशनी शुरू की। इसके लिए आंध्र प्रदेश निवासी जगदीश यादव को हमीरपुर में मुस्तैद किया गया। ताइवान से जैविक खेती का प्रशिक्षण ले चुके इस युवक को संसाधन मुहैया कराये गये। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 7000 किसानों का समूह बनाने का जिम्मा उन्हें सौंपा गया। फिर वर्ष 2015-16 के अनुपूरक बजट में हमीरपुर में जैविक खेती के लिए दो करोड़ रुपये आवंटित किये गये। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री की हिदायत पर ही आंध्र प्रदेश की इस टोली ने हमीरपुर के सात व बांदा केआठ ब्लाकों में 'अन्ना प्रथाÓ खत्म करने का अभियान शुरू किया। बुंदेलखंड में सूखा, पानी के साथ सबसे बड़ी समस्या अन्ना प्रथा ही है। इसमें गर्मियों की शुरूआत से पहले मवेशियों को छोड़ दिया जाता था। अगली फसल के पहले तक वे खुले घूमते थे फिर लोग उन्हें घरों में बांध लेते थे। लगातार सूखा पडऩे के बाद प्रथा ने विस्तार लिया और अब जानवर पूरे समय खुले रहते हैं। माना जाता है कि इस प्रथा के प्रति जागरूकता के जरिये अखिलेश बुंदेलखंड में अपना जनाधार तैयार करने में जुटे थे क्योंकि जागरूकता अभियान में भी अखिलेश को प्रोजेक्ट किया जा रहा था। इससे इतर हमीरपुर में रिश्तेदारी और वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री के तीन बार बुंदेलखंड के दौरे को भी उनके चुनावी जमीन तैयार करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। एक पखवारे पहले लखनऊ में एक टीवी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने खुद राजफाश किया कि हमीरपुर की जिला इकाई ने अखिलेश चुनाव लडऩे का प्रस्ताव भेजा है। मैं भी उस क्षेत्र से चुनाव लडऩे को इच्छुक हूं, प्रस्ताव सपा अध्यक्ष के पास भेजा दिया है। इसके बाग मुख्यमंत्री के बुंदेलखंड से चुनाव लडऩे की चर्चा ने जोर पकड़ा। हालांकि जिन सीटों पर उनके चुनाव लडऩे की चर्चा थी, उस पर प्रत्याशी घोषित हो गये हैं। कहा यह भी जा रहा है कि हमीरपुर से सटे लहुरीमऊ गांव में किसान आंदोलन व भाकियू के आक्रमक रवैये का भी मुख्यमंत्री का कोर ग्र्रुप अध्ययन कर रहा है।
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