Tuesday, 31 January 2017

Samajwadi-2016 दिसंबर-27 ःसपा प्रत्याशियों में हो सकता है बदलाव


२७.१२.२०१६
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- मुलायम से मिले शिवपाल, आजम, बेनी वर्मा और अतीक
- बेनी ने बेटे के लिए रामनगर विधानसभा से मांगा टिकट
- आजम ने नसीर खां समेत पांच प्रत्याशियों के नाम सुझाए
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लखनऊ : टिकट बंटवारे पर समाजवादी परिवार में फिर शुरू हुए महासंग्र्राम के बेकाबू होने से पहले ही मुलायम सिंह यादव ने नियंत्रण का प्रयास शुरू कर दिया है। घोषित प्रत्याशियों में से कुछ बदले जाने की संभावना है। बची हुई सीटों के टिकट संसदीय बोर्ड में चर्चा के बाद घोषित किये जाने के संकेत हैं।
मिशन-2017 के लिए 175 प्रत्याशी घोषित होने के बाद रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी लिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को भेजी थी, जिसमें दागियों समेत दो दर्जन प्रत्याशियों का नाम काट दिया गया था। इसका खुलासा होने के बाद पार्टी में शुरू हुआ मंथन दूसरे दिन भी जारी रहा। मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव, मंत्री आजम खां, राज्यसभा सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा और कानपुर कैंट से प्रत्याशी अतीक अहमद ने विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि शिवपाल और मुलायम के बीच मुख्यमंत्री की लिस्ट पर लंबी चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष ने प्रत्याशियों पर अपने तर्क के साथ फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष पर छोड़ दिया है। सूत्रों का कहना है कि आजम ने अपने करीबी नसीर खां, एक नौकरशाह समेत छह लोगों के लिए टिकट की मांग की जबकि बेनी प्रसाद वर्मा ने अपने बेटे के लिए बाराबंकी की रामनगर विधानसभा से टिकट मांगने के साथ चार और लोगों की पैरवी की है। मुलायम सिंह ने सभी का ब्यौरा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को सौंपा है। दो दिनों के मंथन में मुलायम ने कुछ प्रत्याशियों में बदलाव किये जाने के लिए प्रदेश अध्यक्ष को राजी किया है, हालांकि फैसला नहीं हुआ है।
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निर्दल लड़ेंगे चुनाव
मुलायम से मिलकर निकले कानपुर कैंट के प्रत्याशी अतीक अहमद का कहना है कि पार्टी के अध्यक्ष ने कहा कि वह मजबूती से चुनाव की तैयारी करें, आशीर्वाद है। फिर भी अगर पार्टी उन्हें चुनाव नहीं लड़ाती है तो वह निर्दल ही चुनाव लड़ेंगे और जीतकर मुलायम सिंह यादव के सिपाही बने रहेंगे।
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प्रत्याशियों पर अंतिम फैसला मुलायम करेंगे
- कांग्रेस से गठबंधन कर 300 सीटें जीतने का आकलन अखिलेश का : शिवपाल
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लखनऊ : धर्मनिरपेक्ष दलों को गोलबंद करने की पहल करने वाले समाजवादी पार्टी केप्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव अब कांग्रेस से गठबंधन पर कुछ भी दो टूक कहने को तैयार नहीं है। वह कहते हैं कि कांग्र्रेस से गठबंधन पर फैसला मुलायम सिंह यादव करेंगे, मगर अभी कोई बात नहीं चल रही है।
कांग्रेस से गठबंधन होने पर 300 सीटें जीतने के मुख्यमंत्री के दावे पर शिवपाल ने कहा कि उनका यह आकलन हो सकता है। हम अपने बूते सरकार बनाएंगे। गठबंधन जैसे विषय पर फैसला मुलायम करेंगे। चुनाव विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे। एक सवाल पर यादव ने कहा कि 175 प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं, जल्द बाकी के प्रत्याशी भी घोषित किये जाएंगे। सबकी राय से ही प्रत्याशी घोषित होंगे। माफिया को टिकट देने पर मुख्यमंत्री की नाराजगी के सवाल पर कहा किकहीं-कहीं पर जनता ही इन लोगों को टिकट दिलाना चाहती है। ऐसे में क्या बताया जा सकता है। हम माफिया के साथ हैं। जनता को तय करना है कि वह किसे जिताना चाहती है। टिकट बंटवारे में मतभेद के सवाल पर यादव ने कहा कि कोई मतभेद नहीं है। प्रत्याशियों पर अंतिम फैसला मुलायम सिंह को लेना है। उनके फैसले पर कौन सवाल उठायेगा। नोटबंदी का सपा पर क्या असर है? पर कहा कि नोटबंदी प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी की तानाशाही का प्रतीक है। मजदूरी से जीवन चलाने वाले भुखमरी की कगार पर हैं। परिवार में रार से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है? इस सवाल पर यादव ने कहा कि  मनोबल नहीं टूटा नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं में उत्साह आ गया है। सपा को फायदा हुआ है। अब सरकार का जिम्मा अखिलेश के पास है और संगठन मेरे पास हैं। इससे कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा आई है। वह पूरी ताकत से फिर बहुमत की सरकार बनाएंगे। अखिलेश यादव को फिर मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
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...मैं अपनी बात अधूरी छोड़ता हूं
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- लोकभवन में मुख्यमंत्री की बात के निकाले जा रहे ढेरों निहितार्थ
- परिवार की धारणाएं तोडऩे की बात अनजाने ही सही समाजवादी रार से जुड़ती चली गई
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लखनऊ : समाजवादियों की रार में राज्यसभा सदस्य जया बच्चन ने मंगलवार को सांकेतिक इन्ट्री कर ली। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को स्वप्नदृष्टा ठहराते हुए कहा कि 'बुडढ़े सपने कहां देख पाते हैंÓ। उत्तर प्रदेश को युवा जोश, युवा सोंच वाले नेतृत्व जरूरत है। इस जुमले के ढेरों निहितार्थ निकल ही रहे थे कि मुख्यमंत्री ने यह कहकर कि मैं अपनी बात अधूरी छोड़ता हूं कहकर भविष्य के संकल्प की ओर इशारा कर दिया है।
मौका अदाकारी का हुनर सिखाने वाले संस्थान के शिलान्यास का था, जिसमें ढेरों फिल्मी सितारों के साथ राज्यसभा सदस्य जया बच्चन भी थी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मेजबान की भूमिका में थे। जहां कामयाबी का नया मुकाम हासिल करने लिए परिवार की परम्परागत धारणाएं तोडऩे की बात शुरू हुई तो वह अनजाने ही सही समाजवादी परिवार की रार से जुड़ती चली गई। एफटीआइआइ, पुणे के पूर्व डीन वीरेन्द्र सैनी ने अपने अतीत के पन्ने पलटते हुए कहा कि वह फिल्म की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे थे, तब पिता ने कहा कि सभ्य घरों के बच्चे नचनिया, गवइया बनते हैं क्या? पिता की धारणा तोड़ी और कामयाबी के मंजिल पर पहुंचे। भोजपुरी अभिनेता रवि किशन ने भी ऐसी धारणा का जिक्र करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प के चलते ही उन्हें एक मुकाम मिला। प्रयोगधर्मी निर्माता, निर्देशक अनुराग कश्यप ने सिलसिले को बढ़ाया, अब तक बात सिर्फ धारणा तोडऩे थी मगर अदाकारी से राजनीति में आई जया बच्चन ने अखिलेश को स्वप्न धरातल पर उतारने वाला ठहराते हुए कहा कि 'बुड्ढे सपने का कहां देखते हैंÓ? वह हर शाम दुआ करती हैं कि प्रदेश को युवा जोश-युवा सोंच वाला नेतृत्व मिले, तब पहली बार इसमें सियासी दांव झलका। वह रूकी नहीं, बल्कि 'जय, जय, जय, जय अखिलेशÓ का उदघोष कर रहे युवकों से मुखातिब होकर कहा-'आपकी वजह से यह हिम्मत दिखा पाते हैंÓ। चुनाव के लिए ऊर्जा बचा कर रखें। अब साफ था कि जुमले की पीछे सियासी वार भी और मुख्यमंत्री के पाले में खड़े होने का संकेत बी है।
जगजाहिर है कि राज्यसभा सदस्य अमर सिंह से जया का छत्तीस का आंकड़ा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अंकल के बाद अब उन्हें 'बाहरीÓ कहते हैं। बात रुकी नहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बोलने खड़े हुए तो कहा कुछ लोग धारणा तोडऩे की बात की है। सोंच रहा था कि मैं इस पर कुछ बोलूं न या न बोलू। यहां मौजूद समाजवादी साथी व पत्रकार समझ रहे हैं। ऐसे में 'अपनी बात आधी-अधूरी छोड़ता हूंÓ। इस जुमले में परिवार की परंपरागत धारणा तोडऩे का संकल्प तो था ही, यह संकेत भी था संघर्ष के रास्ते से कामयाबी हासिल करने को वह भी तैयार हैं।
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बेटे की लालबत्ती बचाने को शिवपाल का चुनावी दांव
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-आदित्य यादव अब 2021 तक बने रहेंगे पीसीएफ सभापति
-फरवरी 2018 तक था कार्यकाल, बीच में ही दे दिया इस्तीफा
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लखनऊ : समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के पुत्र आदित्य यादव यूपी कोआपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) के फिर अध्यक्ष चुन लिए गये हैं। अब उनका कार्यकाल 2021 तक रहेगा। यद्यपि आदित्य यादव का कार्यकाल नियमानुसार 2018 तक था, लेकिन बीच में ही इस्तीफा दिलवाकर दोबारा चुनाव की प्रक्रिया अपनाई गयी। विपक्षी नेताओं ने इसे बेटे का कार्यकाल बढ़ाने का शिवपाल का चुनावी दांव करार दिया है।
समाजवादी कुनबे में छिड़े सत्ता संग्राम में यह शिवपाल खेमे की रणनीतिक जीत मानी जा रही है। पीसीएफ प्रबंध समिति के सभापति और सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। प्रक्रिया यह है कि ढाई वर्ष बाद दोबारा चुनाव कराया जा सकता है। कुछ समय पहले आदित्य यादव समेत कई निदेशकों के त्यागपत्र के बाद दोबारा चुनाव की विधिक प्रक्रिया अपनाई गयी। इस दौरान अदालती दांव-पेंच भी चले गये। प्रशासन ने निर्वाचन अधिकारी बनाकर मंगलवार को चुनाव कराया। इसके पहले आदित्य यादव फरवरी 2013 में पीसीएफ के सभापति चुने गये थे। अमूमन यह चुनाव सत्ताधारी दलों के पक्ष में होता है। माना जा रहा है कि एहतियातन शिवपाल खेमे ने सहकारी संस्थाओं में फिर पांच वर्ष के कार्यकाल के लिए इस्तीफे का दांव चलकर दोबारा चुनाव करवाया। इससे सहकारी संस्थाओं पर उनका दबदबा बना रहेगा और लालबत्ती भी मौजूद रहेगी।
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सदस्यों समेत प्रबंध कमेटी का चुनाव
मंगलवार को हुए निर्वाचन आदित्य यादव पीसीएफ के निर्विरोध सभापति चुने गये। प्रबंध कमेटी में मेरठ मंडल से जितेन्द्र यादव, झांसी से घनश्याम अनुरागी, वाराणसी मंडल से विजय शंकर राय, गोरखपुर मंडल से घनश्याम यादव एवं ज्ञानेन्द्र सिंह, लखनऊ मंडल से डॉ. रश्मि यादव एवं अशोक सिंह, आगरा मंडल से सुघर सिंह, कानपुर मंडल से मोहन कुमार यादव, मुरादाबाद से अंजली, बरेली से लक्ष्मी देवी यादव, फैजाबाद मंडल से जितेन्द्र यादव और इलाहाबाद मंडल से सुघर सिंह को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। आदित्य यादव को पीसीएफ के सभापति चुने जाने के साथ ही इफको, कृभको, नेफेड एवं अन्य संस्थाओं में निर्विरोध प्रतिनिधि भी निर्वाचित घोषित किए गये।
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पीसीएफ को व्यवसायिक उन्नति पर पहुंचाना लक्ष्य : आदित्य
दोबारा सभापति चुने जाने के बाद आदित्य यादव ने कहा कि पीसीएफ को व्यवसायिक उन्नति पर पहुंचाना उनका लक्ष्य है। उन्होंने निदेशकों और कर्मचारियों से सहयोग की अपेक्षा के साथ कहा कि वह उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। आदित्य यादव ने निर्वाचन के बाद प्रबंध कमेटी की बैठक में यह भरोसा दिया। सदस्यों ने सभापति का स्वागत किया।
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विपक्ष की प्रतिक्रिया
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अनैतिकता पर चुप्पी तोड़े मुख्यमंत्री : कांग्रेस
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एवं प्रवक्ता द्विजेन्द्र त्रिपाठी ने इसे सत्ता का गेम करार दिया है। कहा कि समाजवादी परिवार की कलह इन्हीं वजहों से चरम पर है। यह दुरुपयोग और मजाक है। पहले भी सपा का ऐसा इतिहास रहा है। त्रिपाठी ने कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद को ईमानदार दिखाना चाहते हैं तो इस अनैतिकता पर अपनी चुप्पी तोड़ें और बताएं कि सच है क्या।
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धांधली और अनैतिक भ्रष्टाचार : भाजपा
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि यह एक अकेला नहीं ऐसे कई मामले हैं। कोआपरेटिव के प्रमुख पदों पर ऐसी धांधली और अनैतिक भ्रष्टाचार देखने को मिला है। यह अकेले शिवपाल की ही नहीं पूरी सपा और सरकार की यह धांधली है। अनेक संस्थाओं में इस्तीफे दिलवाकर यह कुचक्र किया गया है।
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