...अब बढ़ सकती है अधूरी बात
- करीबियों के टिकट कटने के बाद कुछ कठोर कदम उठा सकते हैं मुख्यमंत्री
- भड़केगा समाजवादी परिवार का संग्राम, लिखा जाएगा सियासत का नया इतिहास
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परवेज अहमद, लखनऊ : नए सफर पर निकलने को स्थापित धारणाएं तोडऩे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को रुक गए थे, बुधवार को मर्जी के विरुद्ध प्रत्याशियों की घोषणा के बाद उसके मुखर होने की संभावना है। ऐसा हुआ तो समाजवादी परिवार का संग्र्राम भड़केगा ही, सियासत का नया इतिहास भी लिखा जाएगा।
समाजवादी 'परिवारÓ की नई-पुरानी पीढ़ी के बीच विचारों का मतभेद लंबे समय से हैं। 12 सितंबर के बाद से इसमें वर्चस्व व अधिकारों के इस्तेमाल का तड़का भी लग गया। नतीजन खेमेबंदी हुई। दर्द का छलकना शुरू हुआ, मगर कभी युवा जोश की नुमाइंदगी करने वालों ने 'होश खोयाÓ तो कभी तजुर्बेकारों ने धोबी पाट दांव चल दिया। यही कारण था कि मंगलवार को अदाकारी सिखाने के इंस्टीट्यूट की आधारशिला के दौरान कलाकारों ने स्थापित धारणाएं तोड़कर ही तरक्की की नई परिभाषा लिखने का जिक्र किया तो उसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने सियासी संघर्ष से जोड़ लिया। तब यह कहा भी कि वह सोच रह हैं कि 'इस पर कुछ बोलूं या न बोलू। समाजवादी साथी व पत्रकार समझ रहे हैं। अपनी बात आधी-अधूरी छोड़ता हूंÓ। बात यहीं थम जाती, मगर बुधवार को पार्टी की ओर से जारी 325 प्रत्याशियों की सूची से उनके समर्थकों का पत्ता साफ होने और उनके करीबी मंत्रियों के टिकट न घोषित होने पर उनके घर के बाहर और अंदर जिस तरह से समर्थकों की भीड़ जुटी। लोगों ने उन्हें कुछ करने का हौसला बंधाया और चार लाइन का बिना हस्ताक्षर एक बयान जारी किया गया, जिसमें टिकट पर मुलायम सिंह से बात करने का बात कही गई है, उससे मंगलवार को अधूरी छोड़ी गई बात...के कुछ और आगे बढ़ जाने के संकेत हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस बार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कुछ ठोस फैसले भी ले सकते हैं। हालांकि प्रतिक्रिया स्वरूप उन्होंने आवास विकास विभाग और राजकीय निर्माण विभाग में सलाहकार का ओहदा संभाल रहे दंपती को पैदल कर दिया। इनमें से एक सुलतानपुर से टिकट दिया गया, इसके लिए अखिलेश के करीबी विधायक का टिकट काटा गया। अगर मुख्यमंत्री ने कुछ कठोर कदम उठाया लिया तो समाजवादी परिवार की रार तो बढ़ेगी ही उत्तर प्रदेश की सियासत में नया इतिहास भी लिखा जाएगा। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को परख रहा समाजवादी पार्टी का एक तबका अभी आशान्वित है। उसे उम्मीद है कि मुलायम सिंह यादव फिर कोई ऐसा चरखा दांव चलेंगे, जिससे धधकने को हो गई आग ठंडी पड़ जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को उन मंत्रियों, विधायकों की बैठक बुलाई है, जिनके टिकट काटे गए हैं। इनसे बातचीत के बाद अखिलेश कोई नया सियासी दांव भी चल सकते हैं। टिकट कटने के बाद मंत्री अरविंद सिंह गोप, मंत्री रामगोविंद चौधरी, पवन पाण्डेय और कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की, उनसे बदली परिस्थितियों पर चर्चा भी हुई। इस दौरान अखिलेश समर्थकों ने पांच कालिदास मार्ग पर एकत्रित होकर उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी भी की।
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लखनऊ: समाजवादी पार्टी की पहली सूची में दलबदलुओं को भरपूर तरजीह मिली। पीस पार्टी से आए दोनों विधायकों अनीसुर्रहमान को मुरादाबाद की कांठ और कमाल युसूफ को सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज से प्रत्याशी बनाया गया है। भाजपा छोड़कर आए विजय बहादुर यादव को भी गोरखपुर ग्रामीण सीट से टिकट थमा दिया गया है। कांग्रेस से बगावत करके सपा का दामन थामने वाले मुकेश श्रीवास्तव को बहराइच की पयागपुर सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। श्रीवास्तव को टिकट देते हुए एनआरएचएम घोटाले में उनकी विवादित भूमिका को भी नजरअंदाज किया गया।
बसपा के बागी अयोध्या पाल को भी सपा में आने का इनाम मिला। पाल को फतेहपुर जिले की अयाहशाह सीट से चुनाव लडने की हरी झंडी मिल गयी। बसपा से टिकट करने के बाद सपा में शामिल हुए शाहनवाज राणा को मीरापुर और अब्दुल मन्नान को हरदोई जिले में संडीला से उम्मीदवार बनाया गया है।
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अबरार बने प्रतापगढ़ के सपा जिलाध्यक्ष
लखनऊ : टिकटों के बंटवारे के बीच समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने प्रतापगढ़ की जिला कार्यकारिणी को जिलाध्यक्ष भैया लाल पटेल सहित तत्काल प्रभाव से भंग करते हुए अबरार जहांनिया को को जिलाध्यक्ष नामित किया है। पटेल पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए नवनियुक्त जिलाध्यक्ष को शीघ्र अपनी कमेटी का गठन करने को कहा है।
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मंत्रियों, विधायकों का टिकट नहीं काटना चाहते अखिलेश
- मुरादाबाद और गौतमबुद्धनगर के प्रत्याशियों को लेकर सबसे अधिक मतभेद
- मुख्यमंत्री की ओर से मुलायम को भेजी गई 367 प्रत्याशियों की सूची लीक
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लखनऊ : अखिलेश यादव की मर्जी के बगैर प्रत्याशियों की सूची जारी होने से समाजवादी परिवार का संग्र्राम किस करवट बैठेगा, यह कुछ दिनों में साफ होगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने मंत्रियों और विधायकों के टिकट काटने के पक्षधर नहीं थे। मुरादाबाद और गौतमबुद्धनगर केप्रत्याशियों को लेकर सबसे अधिक मतभेद थे।
संगठन की ओर से तेजी से प्रत्याशियों की घोषणा के बीच दो दिन पहले मुख्यमंत्री ने प्रत्याशियों की एक सूची अध्यक्ष मुलायम सिंह को भेजी थी। 367 प्रत्याशियों की यह सूची बुधवार को सावर्जनिक हुई। इसका विश्लेषण करें तो साफ है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों, विधायकों के टिकट काटने के पक्षधर नहीं हैं। अलबत्ता सबसे ज्यादा विवाद मुस्लिम प्रत्याशियों को लेकर है। मुरादाबाद, सहारनपुर, गौतमबुद्धनगर की सीटों से पार्टी ने जिन मुस्लिमों के प्रत्याशी बनाया है, अखिलेश उनके स्थान पर दूसरे प्रत्याशियों को टिकट देना चाहते थे।
अखिलेश ने नोएडा से सुनील चौधरी को टिकट देने की सिफारिश की थी जबकि वहां से अशोक सिंह चौहान को टिकट मिला है। वह दादरी से राजकुमार भाटी को प्रत्याशी बनाना चाहते थे मगर पार्टी ने रवींद्र भाटी को टिकट दिया है। ऐसे ही जेवर, खुर्जा फतेहपुर सीकरी में भी मुख्यमंत्री जिन्हें प्रत्याशी बनाना चाहते थे, उन्हे टिकट नहीं मिला। यादव राज्य महिला आयोग की चर्चित सदस्य के बेटे राहुल पाण्डेय के स्थान पर अमांपुर से वीरेंद्र सिंह सोलंकी को टिकट देना चाहते थे।
पटियाली से मुख्यमंत्री की पसंद नजीबा खान जीनत के स्थान पर उनकी बेटी नाशी खान को टिकट दिया गया है। वह भोगांव से आलोक कुमार शाक्य को टिकट देना चाहते थे मगर शवबख्श शाक्य को टिकट मिला है। किशनी से मुख्यमंत्री बृजेश कुमार कठेरिया को चाहते थे, मगर संध्या कठेरिया को टिकट दिया गया। यादव बहेड़ी से अताउर्ररहमान को चाहते थे मगर अंजुम रशीद को टिकट दिया गया। वह मीरगंज से हाजी जाहिद हुसैन को चाहते थे मगर टिकट सराफत यार खां को मिल गया। मुख्यमंत्री की सूची में नवाबगंज से भगवत सरन गंगवार का नाम था मगर टिकट डॉ. शहला ताहिर को मिला। वह बरेली शहर से जफर बेग को चाहते थे मगर राजेश अग्रवाल को प्रत्याशी बना दिया गया है।
अखिलेश बरेली कैंट से डॉ. इकबाल सिंह, आंवला से सिद्धराज सिंह, पूरनपुर से पीतमराम, बीसलपुर से नीरज गंगवार, सीतापुर की बिसवां से बुनियाद हुसैन, सिधौली से मनीष रावत, शाहाबाद से बाबू खां, संडीला से कुंवर महावीर सिंह, मलिहाबाद से इंदल कुमार रावत, सुल्तानपुर सदर से अरुण वर्मा और लंभुआ से संतोष पाण्डेय को टिकट देना चाहते थे जबकि इनके स्थान पर दूसरे लोगों को टिकट दिया गया है। वह कायमगंज से अजीत कुमार कठेरिया, दिबियापुर से प्रदीप यादव, औरैया से मदन सिंह गौतम, रसूलाबाद से शिव कुमार बेरिया, अकबरपुर रनिया से रामस्वरूप सिंह बिल्हौर से अरुण कुमारी, घाटमपुर से इंद्रजीत कोरी ललितपुर से ज्योति लोधी, तिंदवारी से दीपा सिंह गौर, जहानाबाद से मदनगोपाल वर्मा की जगह बीना पटेल, बिंदकी से दीनदयालु गुप्ता को प्रत्याशी बनाना चाहते थे।
अखिलेश की सूची में पट्टी से राम सिंह पटेल, मंझनपुर से हेमंत कुमार, चायल से चंद्रबली सिंह, मेजा से गिरीश चंद्र पाण्डेय, इलाहाबाद उत्तरी से संदीप यादव, रामनगर से अरविंद सिंह गोप, अयोध्या में पवन पाण्डेय, टांडा में अजीमुल हक पहलवान, बासगांव में शारदा देवी, रुद्रपुर में प्रदीप यादव, देवरिया में जेपी जायसवाल, मेहनगर में बृजलाल सोनकर, मधुबन में अल्ताफ अंसारी, फेफना में संग्राम सिंह, बांसडीह में राम गोविंद चौधरी, बदलापुर में बाबा दुबे, मुंगरा बादशाहपुर में ज्वाला प्रसाद यादव और शिवपुर से आनंद मोहन उर्फ गुड्डू यादव को टिकट देना चाहते थे, मगर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को जो सूची जारी की, उसमें इन सबके स्थान पर दूसरों को टिकट दिया गया है।
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कमजोर पड़ी सपा कांग्रेस में दोस्ती की आस
- एक दर्जन से अधिक विधायकों के क्षेत्रों में सपा ने उम्मीदवार उतारें, बागी को भी टिकट थमाया
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लखनऊ: सपा की पहली सूची ने कांग्रेस से दोस्ती के कयास पर फिलवक्त बे्रक लगा दिया। बुधवार को जारी 325 उम्मीदवारों की सूची में एक दर्जन से अधिक कांग्रेसी विधायकों के क्षेत्रों में प्रत्याशी घोषित करके गठबंधन की उम्मीदों को न केवल झटका दिया बल्कि बागियों को टिकट थमा कांग्रेस नेतृत्व को चौंकाया भी है।
कांग्रेस विधानमंडल दल नेता प्रदीप माथुर से मुकाबले के लिए सपा ने मथुरा सीट से डा. अशोक अग्रवाल को टिकट थमाया है वहीं उपनेता अनुग्रह नारायण सिंह की इलाहाबाद उत्तरी सीट पर लल्लन राय को उतार कर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दीं। सहारनपुर जिले की देवबंद सीट से उप चुनाव में विजयी हुए माविया अली के सामने सपा ने मीना राणा को मैदान में उतारा है। शामली में पंकज मलिक की राह रोकने के लिए सपा से मनीष कुमार चौहान और हापुड़ में गजराज सिंह के सामने तेजपाल सिंह को खड़ा किया है। जौनपुर में नदीम जावेद को टक्कर देने के लिए सपा ने जावेद सिद्दीकी और बनारस में पिंडरा सीट पर अजय राय के सामने रामबालक सिंह को टिकट दिया है। कांग्रेस के इन कद्दावर नेताओं के मुकाबले उम्मीदवार उतारकर मुलायम सिंह यादव ने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस से समझौते को लेकर उतावले नहीं हैं।
बता दे कि कांग्रेस के 29 विधायकों में से नौ बगावत कर अन्य पार्टियों में ठिकाना तलाश चुके है। सपा से दोस्ती की आस लगाए कांग्रेस नेतृत्व के लिए बागियों को टिकट थमा देना चिढ़ाने से कम नहीं। बहराइच जिले के पयागपुर क्षेत्र से विधायक मुकेश श्रीवास्तव को सपा ने अधिकृत प्रत्याशियों की पहली सूची में स्थान देकर कांग्रेस को चौंका दिया है। सूत्रों का कहना है कि सपा ने पहली सूची जारी करने के बाद मात्र 78 सीटें ही खाली छोड़ी है, ऐसे में गठबंधन के रास्ते लगभग बंद दिख रहे है। मीडिया इंचार्ज व पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी का कहना है कि गठबंधन की चर्चाओं को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयानों से ताकत मिली लेकिन सूची से धर्मनिरपेक्ष ताकतों से निराशा।
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अपने बूते तैयारी में जुटे हैं : राजबब्बर
प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने सपा की सूची पर टिप्पणी से इन्कार करते हुए कहा कि कांग्रेस को दोस्ती की दरकार नहीं थी। केवल सांप्रदायिकता ताकतों को रोकने व धर्मनिरपेक्ष दलों की एक जुटता की उम्मीद जतायी जा रही थी। कांग्रेस अपने बूते पर चुनाव की तैयारी में जुटी है और उम्मीद है कि बेहतर नतीजे मिलेंगे।
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चरण सिंह के अनुयायियों को भी झटका
लखनऊ : सपा की सूची से कांग्रेस ही नहीं राष्ट्रीय लोकदल को भी झटका लगा है। चरण सिंह व लोहिया के अनुयायियों को एक मंच पर ले लाने की कोशिशें बंद दिखती है। रालोद के प्रभाव वाली समस्त सीटों पर सपा ने उम्मीदवार उतार दिए हैं। बता दे कि गठबंधन की उम्मीद में रालोद प्रदेश सरकार के प्रति नरम रूख ही अख्तियार किए था और भाजपा के खिलाफ तेवर दिखा रहा था।
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टिकटों में बदलाव नहीं करूंगा : मुलायम
- सूची जारी करने से पहले मुलायम ने समर्थकों को संबोधित किया
- केंद्र पर साधा निशाना, कहा प्रधानमंत्री ने झूठ बोल जनता को ठगा
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लखनऊ : राजनीति के चतुर सुजान मुलायम सिंह यादव ने प्रत्याशियों की घोषणा से पहले समर्थकों से कहा कि मतभेद सुलझा लो टिकट घोषित होने के बाद जीत में जुट जाना। यह भी कहा कि वह टिकटों में ज्यादा फेरबदल नहीं करेंगे।
मुलायम सिंह यादव ने बुधवार की शाम पत्रकार वार्ता बुलाई थी, लेकिन उससे पहले वह पार्टी कार्यालय में जुटे समर्थकों से मुखातिब हो गए। यहां कहा कि टिकट घोषित होने के बाद कोई मतभेद नहीं होना चाहिए। जहां कोई बात होगी, वहां के लोगों को बुलाकर समझाएंगे। मुलायम ने केन्द्र सरकार व प्रधानमंत्री नरेन्द्र पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने झूठ बोलकर लोगों को ठग लिया है। एक भी वादा पूरा नहीं किया। नोटबंदी से पूरा देश परेशान है। किसान तबाह हो गया है। लोगों के खातों में 15-15 लाख कब भेजेंगे? जनता चुनाव में यह सवाल उनसे जरूर पूछेगी।
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टिकट काटने का दुख होता है
जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वह नाराज होंगे। टिकट काटने पर मुझे भी दुख होता है मगर भरोसा करिये। जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, उनका सम्मान होगा। पहले भी इसका ध्यान रखा है। इस सरकार ने 96 लोगों को गाड़ी, पद देकर सम्मान किया है। इससे कई विधायक दुखी होते हैं, इन्हे गाड़ी मिल गई, मगर उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए, जिनका सम्मान हुआ, उनका संघर्ष कम नहीं है। क्षमता होने, जीत जाने की काबिलियत के बाद भी उन्होंने अपना टिकट छोड़ा है। जिन लोगों ने संघर्ष किया, उन्हें कुछ सम्मान मिलना चाहिए।
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अपमानित नहीं करूंगा
एक सवाल पर मुलायम सिंह ने कहा कि जिन मंत्रियों का टिकट कटा है, उनका नाम लेकर उन्हें अपमानित नहीं करेंगे। कहा कि राजनीति में टिकट मिलते व कटते रहते हैं, मगर किसी के सम्मान में कमी नहीं होने दी जाएगी। बची हुई 78 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का एलान सर्वे व बातचीत के बाद किया जाएगा। कहा कि इतने लोकतांत्रिक तरीके से किसी पार्टी में टिकट नहीं बांटे जाते हैं। जिताऊ उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इतने सारे चुनावों में टिकट बांट चुका हूं मगर पार्टी में कभी विवाद नहीं हुआ। नेता और कार्यकर्ता अनुशासन में रहे हैं।
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28 फरवरी तक हो जाएंगे चुनाव
मुलायम ने कार्यकर्ताओं से कहा कि तजुर्बे के आधार पर कहा रहूं कि विधानसभा के चुनाव 28 फरवरी तक हो जाएंगे। कुछ भी हो जाए, प्रदेश में फिर से सपा की सरकार बनानी है। सपा का पूरे देश में सम्मान है। खुद प्रधानमंत्री भी तारीफ कर चुके हैं।
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हम सूरज से बिजली देते, वह बातों से : अखिलेश
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-मुख्यमंत्री ने महोबा के कनकुआ गांव में सोलर पॉवर प्लांट का किया उद्घाटन
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महोबा : पनवाड़ी इलाके के कनकुआ गांव में सोलर पॉवर प्लांट का उद्घाटन करने के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भाजपा व बसपा पर हमलावर रहे। कहा कि हम सूरज से बिजली देते हैं और वह बातों से। सपा विकास कर रही है और विरोधी सिर्फ बातें। बुंदेलखंड की खुशहाली और तरक्की चाहिए तो सपा का साथ दें।
दो घंटे देरी से पहुंचे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पांच करोड़ रुपये की लागत से बने पॉवर प्लांट का उद्घाटन किया, फिर जनसभा में पूछा कि भाजपा ने महोबा को क्या दिया? सपा की सरकार ने बुंदेलखंड के लिए कई योजनाएं दीं। सोलर पॉवर प्लांट योजना की शुरुआत महोबा से हुई और उनके कार्यकाल में आखिरी सोलर प्लांट भी को मिला। जनता बिजली चाहती है, भाजपा केवल नारा देती है। सपा गांवों में 24 घंटे बिजली देने के लिए प्रयासरत है। भाजपा नए-नए शब्द लाती है जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, कैशलेस। देश में कभी इतने जवान शहीद नहीं हुए जितनी भाजपा की सरकार में। नोटबंदी पर कहा कि जो दो साल में अच्छे दिन नहीं समझ पाया वह कैशलेश क्या समझेगा। नोटबंदी से लोगों को तकलीफ हुई है और देश की अर्थव्यवस्था तथा गरीबों को इससे नुकसान हुआ है। चुनाव लडऩे के लिए सपा के पास विकास का मुद्दा है पर दीगर दलों के पास कुछ नहीं।
अखिलेश ने कहा कि हाथी वाली पार्टी भी अब मुसीबत में है। उन्हें हिसाब किताब देना बाकी है। हिसाब किताब सही न रखने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। हालांकि कांग्रेस को लेकर मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा। स्मार्टफोन, यूपी 100 की भी जानकारी दी। कहा कि हमारी सरकार ने 30 हजार लोगों को नौकरी दी। जनसभा के बाद सात छात्रों को लैपटाप दिया।
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चरखारी से चुनाव पर बोले, बुंदेलखंड की जनता दिल में
बाद में पत्रकारों के सवाल कि क्या वह चरखारी से चुनाव लड़ेंगे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड की जनता उनके दिल में बसती है। उन्हें निराश नहीं होने दिया जाएगा। सपा ने बुंदेलखंड के लिए बहुत कुछ किया है। आगे भी विकास कार्य होते रहेंगे।
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छह यूनिटों का लोकार्पण, एक का शिलान्यास
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां 105 मेगावाट क्षमता के छह सौर ऊर्जा संयंत्रों का लोकार्पण तथा 20 मेगावॉट क्षमता के एक संयंत्र का शिलान्यास किया। इनमें पांच महोबा तथा एक ललितपुर की है। शिलान्यास की गई परियोजना झांसी के गरौठा में लगेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए 148 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था की है।
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अखिलेश की नहीं चली
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- सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 325 पार्टी प्रत्याशियों की जारी की सूची
- तीन मंत्रियों, 46 विधायकों के कटे टिकट, दूसरी सूची जल्द
- मंत्री गोप, पवन, रामगोविंद का टिकट कटा, एक का क्षेत्र बदला
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लखनऊ : अधिकारों के संग्राम के दौर में समाजवादी पार्टी ने मिशन-2017 के लिए 325 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की, उससे साफ है कि मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सरकार और शिवपाल यादव को संगठन पर फैसले का अधिकार सौंप रखा है। जिन तीन मंत्रियों व 46 विधायकों का टिकट काटा गया है, उनमें बड़ी संख्या में अखिलेश समर्थक हैं।
मुख्यमंत्री के कोर ग्रुप के कई मंत्रियों का पहली सूची में नाम नहीं है। हालांकि उनकी सीटों पर प्रत्याशी भी घोषित नहीं किए गए हैं। स्पष्ट है कि टिकट बंटवारे के पहले दौर में अखिलेश यादव की नहीं चली जिससे असंतुष्ट यादव ने झांसी में कहा कि वह टिकट पर नेताजी (मुलायम सिंह यादव) से बात करेंगे, उनका संघर्ष जारी रहेगा। लखनऊ लौटने पर देर शाम उन्होंने कई मंत्रियों, विधायकों के साथ आगे की रणनीति पर चिंतन भी किया।
सितंबर से ढाई माह चले समाजवादी परिवार के संग्र्राम में सुलह के बाद से ही टिकट बांटने के अधिकारों को लेकर जोर आजमाइश चल रही थी। प्रदेश अध्यक्ष ने हाल के दिनों में तेजी से प्रत्याशी घोषित करने शुरू किए तो दो दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी पसंद के प्रत्याशियों की सूची मुलायम सिंह यादव को भेजी थी। इसके बाद संग्र्राम की ज्वाला फिर भड़कने के आसार बने। बुधवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अचानक पत्रकारों को बुलाकर 325 सीटों के प्रत्याशी घोषित करते हुए कहा कि वर्ष 2012 में हारी सीटों में से 149 और जीती हुई सीटों में से 176 पर प्रत्याशी घोषित कर रहे हैं। शेष 78 सीटों के प्रत्याशियों पर सर्वे चल रहा है, इन सीटों के प्रत्याशी भी जल्द घोषित होंगे। मुलायम ने कहा कि 403 सीटों के लिए 4200 लोगों ने आवेदन किया था। राष्ट्रीय महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव ने आवेदकों का साक्षात्कार लेकर प्रत्याशियों की सूची बनाई है। बची हुई सीटों के लिए भी वह साक्षात्कार व सर्वे कर रहे हैं। कहा कि टिकट काटने से कई लोग नाराज होंगे, इसका उन्हें भी दुख होता है, मगर व्यवस्था के लिए कई बार फैसले लेने पड़ते हैं।
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तीन मंत्रियों के नाम गायब
मुलायम सिंह ने प्रत्याशियों की जो पहली सूची जारी की, उसमें पूर्व प्रदेश महासचिव व ग्र्राम्य विकास मंत्री अरविंद सिंह गोप की रामनगर विधानसभा सीट पर राज्यसभा सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को प्रत्याशी बना दिया गया। सपा से निष्कासित होने के बाद भी राज्यमंत्री का ओहदार बरकरार रखने वाले पवन पाण्डेय का भी टिकट काट दिया गया। उनकी अयोध्या सीट पर उनके ही ममेरे भाई आशीष पाण्डेय को प्रत्याशी बना दिया गया। पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के साथ सियासी सफर शुरू करने वाले वरिष्ठ मंत्री राम गोविंद चौधरी का भी टिकट काट दिया गया है। बलिया जिले में उनकी परंपरागत सीट बांसडीह से नीरज सिंह गुड्डू को प्रत्याशी बना दिया गया।
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इनके कटे टिकट
बाराबंकी के रामनगर से विधायक एवं मंत्री अरविंद सिंह गोप, बलिया के बांसडीह से विधायक एवं मंत्री राम गोविंद चौधरी, अयोध्या से विधायक एवं मंत्री पवन पाण्डेय, ठाकुरद्वारा से नवाब जान, मुरादाबाद ग्रामीण से शमीमुलहक, मुरादाबाद शहर से युसूफ अंसारी, बिलारी से मोहम्मद फहीम, धनौरा से मैकल चंद्रा, नौगावा सादात से अशफाक अली खान, डिबाई से भगवान शर्मा, शिकारपुर से मुकेश शर्मा, छर्रा से राकेश सिंह, पटियाली से नजीबा खान जीनत, भोगांव से आलोक कुमार शाक्य, किशनी से बृजेश कठेरिया,बदायूं से आबिद रजा, बहेड़ी से अताउर्रहमान, नवाबगंज से भगवत शरण गंगवार, पूरनपुर से पीतम राम,निघासन से कृष्ण गोपाल पटेल, सिधौली से मनीष रावत, शाहाबाद से बाबू खान, गोपामऊ से श्याम प्रकाश,संडीला से कुंवर महावीर सिंह, मलिहाबाद से इंदल कुमार, सुलतानपुर सदर से अरुण वर्मा, लम्भुआ से संतोष पाण्डेय, कायमगंज से विजय सिंह, दिबियापुर से प्रदीप कुमार, औरैया से मदन सिंह, अकबरपुर रनिया से राम स्वरूप सिंह, घाटमपुर से इंद्रजीत कोरी, जहानाबाद से मैदान गोपाल वर्मा, पट्टी से राम सिंह, मेजा से गिरीश चंद्रा, जैदपुर से राम गोपाल, टांडा से अजीमुलहक पहलवान, आलापुर से भीम प्रसाद, महसी से कृष्ण कुमार ओझा, बलरामपुर से जगराम पासवान,तरबगंज से अवधेश कुमार सिंह, शोहरतगढ़ से लालमुनि सिंह, फरेन्दा से विनोद मणि त्रिपाठी, बरहज से प्रेम प्रकाश सिंह, मेहनगर से बृज लाल सोनकर, बदलापुर से ओमप्रकाश बाबा दूबे और घोरावल से रमेश चंद्रा का टिकट काट दिया गया है।
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अखिलेश जहां से चाहें लड़ें
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विधानसभा चुनाव लडऩे और बुंदेलखंड की कोई सीट चुनने के सवाल पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि वह जहां से चाहें, वहां से चुनाव लड़ सकते हैं। फैसला उनको लेना है। हालांकि इशारा किया कि उनके अभी चुनाव लडऩे की बात नहीं है।
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दो मंत्रियों व एक पूर्व मंत्री का क्षेत्र बदला
समाजवादी पार्टी ने बिल्हौर की विधायक व राज्यमंत्री अरुण कुमार कोरी को रसूलाबाद से प्रत्याशी घोषित किया है जबकि इस सीट से चुनाव लड़ते रहे पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया को अब बिल्हौर से प्रत्याशी बनाया गया है। इसी तरह गोंडा से चुनाव जीतकर कृषि मंत्री बने विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को पार्टी ने अब तबरगंज विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है। पंडित सिंह को प्रो.राम गोपाल यादव का बेहद करीबी माना जाता है।
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अखिलेश के करीबी मंत्रियों पर असमंजस
सपा मुखिया द्वारा घोषित पहली सूची में सिर्फ तीन मंत्रियों का टिकट ही नहीं कटा बल्कि दर्जन भर मंत्री इसमें स्थान पाने से वंचित रह गए। इस फैसले ने समाजवादी सियासत में खलबली पैदा कर दी है। टिकट की सूची से नदारद ज्यादातर मंत्रियों को मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता है। मंत्री राम गोविंद चौधरी, अरविंद सिंह गोप और तेज नारायण उर्फ पवन पाण्डेय की सीट पर सपा ने दूसरे उम्मीदवार उतार दिए हैं मगर करीब दर्जन भर मंत्रियों का न तो पहली सूची में नाम घोषित किया गया और न ही वहां दूसरे उम्मीदवार घोषित किए गए। इन मंत्रियों को असमंजस में डाल दिया गया है। खास बात यह कि ये सभी अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। इनमें खाद्य एवं रसद मंत्री कमाल अख्तर, चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री शिवाकांत ओझा, कर एवं निबंधन मंत्री यासर शाह, कौशल विकास मंत्री अभिषेक मिश्र, गन्ना विकास व चीनी मिल मंत्री नरेन्द्र वर्मा, समाज कल्याण मंत्री शंखलाल मांझी, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री वसीम अहमद, नियोजन एवं ऊर्जा राज्यमंत्री शैलेन्द्र यादव उर्फ ललई, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुधीर कुमार रावत, खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री हेमराज वर्मा और समाज कल्याण राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध को पहली बार टिकट नहीं दिया गया है।
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टिकट की सूची पर शिवपाल की छाया
- पार्टी ड्रामा और कुनबे की कलह के बीच चल रही व्याख्या
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लखनऊ : समाजवादी पार्टी के शूरमा भले यह कहें कि मुलायम सिंह यादव ने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दिया है लेकिन इस सूची पर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की छाया साफ दिख रही है। कई बार के हेरफेर के बाद भी सूची में ज्यादातर शिवपाल के पसंदीदा उम्मीदवार हैं। सियासी हलकों में पारिवारिक ड्रामा से लेकर कुनबे के कलह के बीच इसकी व्याख्या की जा रही है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह कहा था कि 2017 के चुनाव में परीक्षा उनकी होनी है इसलिए वही उम्मीदवारों का चयन करेंगे। पर इनमें कई ऐसे उम्मीदवार घोषित किए गए जिन्हें वह पार्टी में देखना भी नहीं चाहते थे। अवैध कब्जा और पार्टी विरोधी गतिविधियों के इल्जाम में बाहर किए गए सीतापुर जिले के बिसवां विधायक रामपाल यादव की एक दिन पहले पार्टी में वापसी कराई गई और उनका टिकट भी पक्का कर दिया गया। जाहिर है कि अखिलेश सरकार ने जिस विधायक के कब्जे पर बुलडोजर चलवाकर एक मिसाल कायम करने की पहल की, उसी विधायक की पार्टी में वापसी ने यह मैसेज दे दिया कि सिक्का किसका चल रहा है।
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तीनों मंत्री बने थे शिवपाल की आंख की किरकिरी : प्रदेश सरकार के मंत्री राम गोविंद चौधरी, अरविन्द सिंह गोप और तेज नारायण उर्फ पवन पाण्डेय का टिकट यूं ही नहीं कटा। तीनों शिवपाल की आंख की किरकिरी बन गए थे। पवन पाण्डेय एमएलसी आशु मलिक के साथ अभद्र व्यवहार कर नेताजी की भी निगाहों में चढ़ गए थे। उन्हें पार्टी से बाहर किया गया तो यह उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल से भी हटाए जाएंगे लेकिन अखिलेश ने उन्हें बनाये रखा। इस वजह से भी पहली सूची में उनका टिकट काटकर हैसियत नापने की कोशिश की गई है। खास बात यह कि टिकट भी उनके ही ममेरे भाई को दिया गया है जिनके साथ सियासी प्रतिद्वंद्विता की चर्चा चल पड़ी थी। चाचा-भतीजे की लड़ाई में राम गोविंद चौधरी और गोप मुख्यमंत्री के साथ खुलकर थे। गोप के लिए सबसे बड़ी मुसीबत सांसद और पूर्व मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा बन गए हैं। उनके बेटे को ही गोप की सीट से टिकट मिला है।
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शिवपाल की यारी का बर्खास्त मंत्रियों को इनाम : समाजवादी कुनबे की रार का यह एक नया रूप है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिन मंत्रियों को बर्खास्त किया था उनमें से ज्यादातर मुलायम सिंह यादव की घोषित पहली सूची में टिकट पाने में कामयाब हुए। इसे शिवपाल की यारी निभाने का इनाम माना जा रहा है। बर्खास्त मंत्री नारद राय, अंबिका चौधरी, शादाब फातिमा, ओमप्रकाश सिंह, राजा महेन्द्र अरिदमन सिंह, शिव कुमार बेरिया, योगेश प्रताप सिंह और राजकिशोर सिंह के टिकट घोषित कर दिए गए हैं। शिवपाल सिंह यादव का नाम भी इस सूची में घोषित है। खास बात यह कि राजकिशोर अपने भाई डिंपल को भी टिकट दिलाने में सफल रहे जबकि अरिदमन की पत्नी पक्षालिका सिंह को भी टिकट मिला है।
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बाहुबलियों की गली दाल : अखिलेश यादव ने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे बाहुबलियों से दूरी बनाने की भले कोशिश की लेकिन दूसरे खेमे ने इसमें बाजी मार ली। ज्यादातर बाहुबलियों और दागियों की दाल गली है। अतीक अहमद का कानपुर कैंट से टिकट बहाल रखा गया है जबकि इलाहाबाद विवाद के बाद उनके टिकट कटने की बात पक्की मानी जा रही थी। बाहुबली मुख्तार अंसारी का टिकट तो नहीं दिया गया लेकिन उनके भाई का सिबगतुल्लाह से टिकट घोषित कर दिया गया है। एनआरएचएम घोटाले के आरोपी कांग्रेस छोड़कर आए विधायक मुकेश श्रीवास्तव भी टिकट पाने में कामयाब रहे।
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अखिलेश के करीबियों का नाम नहीं
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबियों में शुमार लखनऊ उत्तर के विधायक व मंत्री अभिषेक मिश्रा, प्रतापगढ़ के रानीगंज से विधायक व मंत्री शिवाकांत ओझा, अमरोहा सदर से विधायक व मंत्री कमाल अख्तर, बहराइच के मटेरा से विधायक व मंत्री याशर शाह और जौनपुर जिले विधायक व मंत्री ललई यादव को प्रत्याशियों की पहली सूची में नाम नहीं मिला है।
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टिकटों पर मुलायम का फैसला सर्वोपरि: नंदा
मथुरा : समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कहा है कि विधानसभा प्रत्याशियों की सूची पर अध्यक्ष मुलायम ङ्क्षसह क ा फैसला सर्वोपरि है, पार्टी में सूची तो किसी की भी हो सकती है। उन्होंने साफ किया कि सपा चुनाव में कांग्र्रेस सहित किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी।
मुलायम संदेश यात्रा को रवाना करने से पहले नंदा बुधवार को यहां एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सपा प्रदेश की सभी 403 सीटों पर चुनाव लडऩे जा रही है। भाजपा को जनता उसे सबक सिखाएगी। मायावती पर धन के सवाल पर बोले कि यह तो मायावती से ही पूछें कि उन पर इतना धन कहां से आया। अतीक अहमद के बाहुबली होने पर खुलकर बोलने से वे बचते रहे। कहा कि पहले भी उनको टिकट मिल चुका है, इसलिए फिर प्रत्याशी बनाया है। चुनाव में अखिलेश को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने के सवाल पर वरिष्ठ सपा नेता ने कहा कि पार्टी जिसे नेता चुनती है, वही मुख्यमंत्री बनता है।
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- करीबियों के टिकट कटने के बाद कुछ कठोर कदम उठा सकते हैं मुख्यमंत्री
- भड़केगा समाजवादी परिवार का संग्राम, लिखा जाएगा सियासत का नया इतिहास
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परवेज अहमद, लखनऊ : नए सफर पर निकलने को स्थापित धारणाएं तोडऩे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को रुक गए थे, बुधवार को मर्जी के विरुद्ध प्रत्याशियों की घोषणा के बाद उसके मुखर होने की संभावना है। ऐसा हुआ तो समाजवादी परिवार का संग्र्राम भड़केगा ही, सियासत का नया इतिहास भी लिखा जाएगा।
समाजवादी 'परिवारÓ की नई-पुरानी पीढ़ी के बीच विचारों का मतभेद लंबे समय से हैं। 12 सितंबर के बाद से इसमें वर्चस्व व अधिकारों के इस्तेमाल का तड़का भी लग गया। नतीजन खेमेबंदी हुई। दर्द का छलकना शुरू हुआ, मगर कभी युवा जोश की नुमाइंदगी करने वालों ने 'होश खोयाÓ तो कभी तजुर्बेकारों ने धोबी पाट दांव चल दिया। यही कारण था कि मंगलवार को अदाकारी सिखाने के इंस्टीट्यूट की आधारशिला के दौरान कलाकारों ने स्थापित धारणाएं तोड़कर ही तरक्की की नई परिभाषा लिखने का जिक्र किया तो उसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने सियासी संघर्ष से जोड़ लिया। तब यह कहा भी कि वह सोच रह हैं कि 'इस पर कुछ बोलूं या न बोलू। समाजवादी साथी व पत्रकार समझ रहे हैं। अपनी बात आधी-अधूरी छोड़ता हूंÓ। बात यहीं थम जाती, मगर बुधवार को पार्टी की ओर से जारी 325 प्रत्याशियों की सूची से उनके समर्थकों का पत्ता साफ होने और उनके करीबी मंत्रियों के टिकट न घोषित होने पर उनके घर के बाहर और अंदर जिस तरह से समर्थकों की भीड़ जुटी। लोगों ने उन्हें कुछ करने का हौसला बंधाया और चार लाइन का बिना हस्ताक्षर एक बयान जारी किया गया, जिसमें टिकट पर मुलायम सिंह से बात करने का बात कही गई है, उससे मंगलवार को अधूरी छोड़ी गई बात...के कुछ और आगे बढ़ जाने के संकेत हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस बार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कुछ ठोस फैसले भी ले सकते हैं। हालांकि प्रतिक्रिया स्वरूप उन्होंने आवास विकास विभाग और राजकीय निर्माण विभाग में सलाहकार का ओहदा संभाल रहे दंपती को पैदल कर दिया। इनमें से एक सुलतानपुर से टिकट दिया गया, इसके लिए अखिलेश के करीबी विधायक का टिकट काटा गया। अगर मुख्यमंत्री ने कुछ कठोर कदम उठाया लिया तो समाजवादी परिवार की रार तो बढ़ेगी ही उत्तर प्रदेश की सियासत में नया इतिहास भी लिखा जाएगा। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को परख रहा समाजवादी पार्टी का एक तबका अभी आशान्वित है। उसे उम्मीद है कि मुलायम सिंह यादव फिर कोई ऐसा चरखा दांव चलेंगे, जिससे धधकने को हो गई आग ठंडी पड़ जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को उन मंत्रियों, विधायकों की बैठक बुलाई है, जिनके टिकट काटे गए हैं। इनसे बातचीत के बाद अखिलेश कोई नया सियासी दांव भी चल सकते हैं। टिकट कटने के बाद मंत्री अरविंद सिंह गोप, मंत्री रामगोविंद चौधरी, पवन पाण्डेय और कई विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की, उनसे बदली परिस्थितियों पर चर्चा भी हुई। इस दौरान अखिलेश समर्थकों ने पांच कालिदास मार्ग पर एकत्रित होकर उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी भी की।
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लखनऊ: समाजवादी पार्टी की पहली सूची में दलबदलुओं को भरपूर तरजीह मिली। पीस पार्टी से आए दोनों विधायकों अनीसुर्रहमान को मुरादाबाद की कांठ और कमाल युसूफ को सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज से प्रत्याशी बनाया गया है। भाजपा छोड़कर आए विजय बहादुर यादव को भी गोरखपुर ग्रामीण सीट से टिकट थमा दिया गया है। कांग्रेस से बगावत करके सपा का दामन थामने वाले मुकेश श्रीवास्तव को बहराइच की पयागपुर सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। श्रीवास्तव को टिकट देते हुए एनआरएचएम घोटाले में उनकी विवादित भूमिका को भी नजरअंदाज किया गया।
बसपा के बागी अयोध्या पाल को भी सपा में आने का इनाम मिला। पाल को फतेहपुर जिले की अयाहशाह सीट से चुनाव लडने की हरी झंडी मिल गयी। बसपा से टिकट करने के बाद सपा में शामिल हुए शाहनवाज राणा को मीरापुर और अब्दुल मन्नान को हरदोई जिले में संडीला से उम्मीदवार बनाया गया है।
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अबरार बने प्रतापगढ़ के सपा जिलाध्यक्ष
लखनऊ : टिकटों के बंटवारे के बीच समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने प्रतापगढ़ की जिला कार्यकारिणी को जिलाध्यक्ष भैया लाल पटेल सहित तत्काल प्रभाव से भंग करते हुए अबरार जहांनिया को को जिलाध्यक्ष नामित किया है। पटेल पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए नवनियुक्त जिलाध्यक्ष को शीघ्र अपनी कमेटी का गठन करने को कहा है।
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मंत्रियों, विधायकों का टिकट नहीं काटना चाहते अखिलेश
- मुरादाबाद और गौतमबुद्धनगर के प्रत्याशियों को लेकर सबसे अधिक मतभेद
- मुख्यमंत्री की ओर से मुलायम को भेजी गई 367 प्रत्याशियों की सूची लीक
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लखनऊ : अखिलेश यादव की मर्जी के बगैर प्रत्याशियों की सूची जारी होने से समाजवादी परिवार का संग्र्राम किस करवट बैठेगा, यह कुछ दिनों में साफ होगा। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने मंत्रियों और विधायकों के टिकट काटने के पक्षधर नहीं थे। मुरादाबाद और गौतमबुद्धनगर केप्रत्याशियों को लेकर सबसे अधिक मतभेद थे।
संगठन की ओर से तेजी से प्रत्याशियों की घोषणा के बीच दो दिन पहले मुख्यमंत्री ने प्रत्याशियों की एक सूची अध्यक्ष मुलायम सिंह को भेजी थी। 367 प्रत्याशियों की यह सूची बुधवार को सावर्जनिक हुई। इसका विश्लेषण करें तो साफ है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों, विधायकों के टिकट काटने के पक्षधर नहीं हैं। अलबत्ता सबसे ज्यादा विवाद मुस्लिम प्रत्याशियों को लेकर है। मुरादाबाद, सहारनपुर, गौतमबुद्धनगर की सीटों से पार्टी ने जिन मुस्लिमों के प्रत्याशी बनाया है, अखिलेश उनके स्थान पर दूसरे प्रत्याशियों को टिकट देना चाहते थे।
अखिलेश ने नोएडा से सुनील चौधरी को टिकट देने की सिफारिश की थी जबकि वहां से अशोक सिंह चौहान को टिकट मिला है। वह दादरी से राजकुमार भाटी को प्रत्याशी बनाना चाहते थे मगर पार्टी ने रवींद्र भाटी को टिकट दिया है। ऐसे ही जेवर, खुर्जा फतेहपुर सीकरी में भी मुख्यमंत्री जिन्हें प्रत्याशी बनाना चाहते थे, उन्हे टिकट नहीं मिला। यादव राज्य महिला आयोग की चर्चित सदस्य के बेटे राहुल पाण्डेय के स्थान पर अमांपुर से वीरेंद्र सिंह सोलंकी को टिकट देना चाहते थे।
पटियाली से मुख्यमंत्री की पसंद नजीबा खान जीनत के स्थान पर उनकी बेटी नाशी खान को टिकट दिया गया है। वह भोगांव से आलोक कुमार शाक्य को टिकट देना चाहते थे मगर शवबख्श शाक्य को टिकट मिला है। किशनी से मुख्यमंत्री बृजेश कुमार कठेरिया को चाहते थे, मगर संध्या कठेरिया को टिकट दिया गया। यादव बहेड़ी से अताउर्ररहमान को चाहते थे मगर अंजुम रशीद को टिकट दिया गया। वह मीरगंज से हाजी जाहिद हुसैन को चाहते थे मगर टिकट सराफत यार खां को मिल गया। मुख्यमंत्री की सूची में नवाबगंज से भगवत सरन गंगवार का नाम था मगर टिकट डॉ. शहला ताहिर को मिला। वह बरेली शहर से जफर बेग को चाहते थे मगर राजेश अग्रवाल को प्रत्याशी बना दिया गया है।
अखिलेश बरेली कैंट से डॉ. इकबाल सिंह, आंवला से सिद्धराज सिंह, पूरनपुर से पीतमराम, बीसलपुर से नीरज गंगवार, सीतापुर की बिसवां से बुनियाद हुसैन, सिधौली से मनीष रावत, शाहाबाद से बाबू खां, संडीला से कुंवर महावीर सिंह, मलिहाबाद से इंदल कुमार रावत, सुल्तानपुर सदर से अरुण वर्मा और लंभुआ से संतोष पाण्डेय को टिकट देना चाहते थे जबकि इनके स्थान पर दूसरे लोगों को टिकट दिया गया है। वह कायमगंज से अजीत कुमार कठेरिया, दिबियापुर से प्रदीप यादव, औरैया से मदन सिंह गौतम, रसूलाबाद से शिव कुमार बेरिया, अकबरपुर रनिया से रामस्वरूप सिंह बिल्हौर से अरुण कुमारी, घाटमपुर से इंद्रजीत कोरी ललितपुर से ज्योति लोधी, तिंदवारी से दीपा सिंह गौर, जहानाबाद से मदनगोपाल वर्मा की जगह बीना पटेल, बिंदकी से दीनदयालु गुप्ता को प्रत्याशी बनाना चाहते थे।
अखिलेश की सूची में पट्टी से राम सिंह पटेल, मंझनपुर से हेमंत कुमार, चायल से चंद्रबली सिंह, मेजा से गिरीश चंद्र पाण्डेय, इलाहाबाद उत्तरी से संदीप यादव, रामनगर से अरविंद सिंह गोप, अयोध्या में पवन पाण्डेय, टांडा में अजीमुल हक पहलवान, बासगांव में शारदा देवी, रुद्रपुर में प्रदीप यादव, देवरिया में जेपी जायसवाल, मेहनगर में बृजलाल सोनकर, मधुबन में अल्ताफ अंसारी, फेफना में संग्राम सिंह, बांसडीह में राम गोविंद चौधरी, बदलापुर में बाबा दुबे, मुंगरा बादशाहपुर में ज्वाला प्रसाद यादव और शिवपुर से आनंद मोहन उर्फ गुड्डू यादव को टिकट देना चाहते थे, मगर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बुधवार को जो सूची जारी की, उसमें इन सबके स्थान पर दूसरों को टिकट दिया गया है।
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कमजोर पड़ी सपा कांग्रेस में दोस्ती की आस
- एक दर्जन से अधिक विधायकों के क्षेत्रों में सपा ने उम्मीदवार उतारें, बागी को भी टिकट थमाया
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लखनऊ: सपा की पहली सूची ने कांग्रेस से दोस्ती के कयास पर फिलवक्त बे्रक लगा दिया। बुधवार को जारी 325 उम्मीदवारों की सूची में एक दर्जन से अधिक कांग्रेसी विधायकों के क्षेत्रों में प्रत्याशी घोषित करके गठबंधन की उम्मीदों को न केवल झटका दिया बल्कि बागियों को टिकट थमा कांग्रेस नेतृत्व को चौंकाया भी है।
कांग्रेस विधानमंडल दल नेता प्रदीप माथुर से मुकाबले के लिए सपा ने मथुरा सीट से डा. अशोक अग्रवाल को टिकट थमाया है वहीं उपनेता अनुग्रह नारायण सिंह की इलाहाबाद उत्तरी सीट पर लल्लन राय को उतार कर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दीं। सहारनपुर जिले की देवबंद सीट से उप चुनाव में विजयी हुए माविया अली के सामने सपा ने मीना राणा को मैदान में उतारा है। शामली में पंकज मलिक की राह रोकने के लिए सपा से मनीष कुमार चौहान और हापुड़ में गजराज सिंह के सामने तेजपाल सिंह को खड़ा किया है। जौनपुर में नदीम जावेद को टक्कर देने के लिए सपा ने जावेद सिद्दीकी और बनारस में पिंडरा सीट पर अजय राय के सामने रामबालक सिंह को टिकट दिया है। कांग्रेस के इन कद्दावर नेताओं के मुकाबले उम्मीदवार उतारकर मुलायम सिंह यादव ने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस से समझौते को लेकर उतावले नहीं हैं।
बता दे कि कांग्रेस के 29 विधायकों में से नौ बगावत कर अन्य पार्टियों में ठिकाना तलाश चुके है। सपा से दोस्ती की आस लगाए कांग्रेस नेतृत्व के लिए बागियों को टिकट थमा देना चिढ़ाने से कम नहीं। बहराइच जिले के पयागपुर क्षेत्र से विधायक मुकेश श्रीवास्तव को सपा ने अधिकृत प्रत्याशियों की पहली सूची में स्थान देकर कांग्रेस को चौंका दिया है। सूत्रों का कहना है कि सपा ने पहली सूची जारी करने के बाद मात्र 78 सीटें ही खाली छोड़ी है, ऐसे में गठबंधन के रास्ते लगभग बंद दिख रहे है। मीडिया इंचार्ज व पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी का कहना है कि गठबंधन की चर्चाओं को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयानों से ताकत मिली लेकिन सूची से धर्मनिरपेक्ष ताकतों से निराशा।
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अपने बूते तैयारी में जुटे हैं : राजबब्बर
प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने सपा की सूची पर टिप्पणी से इन्कार करते हुए कहा कि कांग्रेस को दोस्ती की दरकार नहीं थी। केवल सांप्रदायिकता ताकतों को रोकने व धर्मनिरपेक्ष दलों की एक जुटता की उम्मीद जतायी जा रही थी। कांग्रेस अपने बूते पर चुनाव की तैयारी में जुटी है और उम्मीद है कि बेहतर नतीजे मिलेंगे।
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चरण सिंह के अनुयायियों को भी झटका
लखनऊ : सपा की सूची से कांग्रेस ही नहीं राष्ट्रीय लोकदल को भी झटका लगा है। चरण सिंह व लोहिया के अनुयायियों को एक मंच पर ले लाने की कोशिशें बंद दिखती है। रालोद के प्रभाव वाली समस्त सीटों पर सपा ने उम्मीदवार उतार दिए हैं। बता दे कि गठबंधन की उम्मीद में रालोद प्रदेश सरकार के प्रति नरम रूख ही अख्तियार किए था और भाजपा के खिलाफ तेवर दिखा रहा था।
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टिकटों में बदलाव नहीं करूंगा : मुलायम
- सूची जारी करने से पहले मुलायम ने समर्थकों को संबोधित किया
- केंद्र पर साधा निशाना, कहा प्रधानमंत्री ने झूठ बोल जनता को ठगा
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लखनऊ : राजनीति के चतुर सुजान मुलायम सिंह यादव ने प्रत्याशियों की घोषणा से पहले समर्थकों से कहा कि मतभेद सुलझा लो टिकट घोषित होने के बाद जीत में जुट जाना। यह भी कहा कि वह टिकटों में ज्यादा फेरबदल नहीं करेंगे।
मुलायम सिंह यादव ने बुधवार की शाम पत्रकार वार्ता बुलाई थी, लेकिन उससे पहले वह पार्टी कार्यालय में जुटे समर्थकों से मुखातिब हो गए। यहां कहा कि टिकट घोषित होने के बाद कोई मतभेद नहीं होना चाहिए। जहां कोई बात होगी, वहां के लोगों को बुलाकर समझाएंगे। मुलायम ने केन्द्र सरकार व प्रधानमंत्री नरेन्द्र पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने झूठ बोलकर लोगों को ठग लिया है। एक भी वादा पूरा नहीं किया। नोटबंदी से पूरा देश परेशान है। किसान तबाह हो गया है। लोगों के खातों में 15-15 लाख कब भेजेंगे? जनता चुनाव में यह सवाल उनसे जरूर पूछेगी।
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टिकट काटने का दुख होता है
जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, वह नाराज होंगे। टिकट काटने पर मुझे भी दुख होता है मगर भरोसा करिये। जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा, उनका सम्मान होगा। पहले भी इसका ध्यान रखा है। इस सरकार ने 96 लोगों को गाड़ी, पद देकर सम्मान किया है। इससे कई विधायक दुखी होते हैं, इन्हे गाड़ी मिल गई, मगर उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए, जिनका सम्मान हुआ, उनका संघर्ष कम नहीं है। क्षमता होने, जीत जाने की काबिलियत के बाद भी उन्होंने अपना टिकट छोड़ा है। जिन लोगों ने संघर्ष किया, उन्हें कुछ सम्मान मिलना चाहिए।
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अपमानित नहीं करूंगा
एक सवाल पर मुलायम सिंह ने कहा कि जिन मंत्रियों का टिकट कटा है, उनका नाम लेकर उन्हें अपमानित नहीं करेंगे। कहा कि राजनीति में टिकट मिलते व कटते रहते हैं, मगर किसी के सम्मान में कमी नहीं होने दी जाएगी। बची हुई 78 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का एलान सर्वे व बातचीत के बाद किया जाएगा। कहा कि इतने लोकतांत्रिक तरीके से किसी पार्टी में टिकट नहीं बांटे जाते हैं। जिताऊ उम्मीदवारों को टिकट दिया है। इतने सारे चुनावों में टिकट बांट चुका हूं मगर पार्टी में कभी विवाद नहीं हुआ। नेता और कार्यकर्ता अनुशासन में रहे हैं।
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28 फरवरी तक हो जाएंगे चुनाव
मुलायम ने कार्यकर्ताओं से कहा कि तजुर्बे के आधार पर कहा रहूं कि विधानसभा के चुनाव 28 फरवरी तक हो जाएंगे। कुछ भी हो जाए, प्रदेश में फिर से सपा की सरकार बनानी है। सपा का पूरे देश में सम्मान है। खुद प्रधानमंत्री भी तारीफ कर चुके हैं।
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हम सूरज से बिजली देते, वह बातों से : अखिलेश
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-मुख्यमंत्री ने महोबा के कनकुआ गांव में सोलर पॉवर प्लांट का किया उद्घाटन
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महोबा : पनवाड़ी इलाके के कनकुआ गांव में सोलर पॉवर प्लांट का उद्घाटन करने के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भाजपा व बसपा पर हमलावर रहे। कहा कि हम सूरज से बिजली देते हैं और वह बातों से। सपा विकास कर रही है और विरोधी सिर्फ बातें। बुंदेलखंड की खुशहाली और तरक्की चाहिए तो सपा का साथ दें।
दो घंटे देरी से पहुंचे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पांच करोड़ रुपये की लागत से बने पॉवर प्लांट का उद्घाटन किया, फिर जनसभा में पूछा कि भाजपा ने महोबा को क्या दिया? सपा की सरकार ने बुंदेलखंड के लिए कई योजनाएं दीं। सोलर पॉवर प्लांट योजना की शुरुआत महोबा से हुई और उनके कार्यकाल में आखिरी सोलर प्लांट भी को मिला। जनता बिजली चाहती है, भाजपा केवल नारा देती है। सपा गांवों में 24 घंटे बिजली देने के लिए प्रयासरत है। भाजपा नए-नए शब्द लाती है जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, कैशलेस। देश में कभी इतने जवान शहीद नहीं हुए जितनी भाजपा की सरकार में। नोटबंदी पर कहा कि जो दो साल में अच्छे दिन नहीं समझ पाया वह कैशलेश क्या समझेगा। नोटबंदी से लोगों को तकलीफ हुई है और देश की अर्थव्यवस्था तथा गरीबों को इससे नुकसान हुआ है। चुनाव लडऩे के लिए सपा के पास विकास का मुद्दा है पर दीगर दलों के पास कुछ नहीं।
अखिलेश ने कहा कि हाथी वाली पार्टी भी अब मुसीबत में है। उन्हें हिसाब किताब देना बाकी है। हिसाब किताब सही न रखने वालों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। हालांकि कांग्रेस को लेकर मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा। स्मार्टफोन, यूपी 100 की भी जानकारी दी। कहा कि हमारी सरकार ने 30 हजार लोगों को नौकरी दी। जनसभा के बाद सात छात्रों को लैपटाप दिया।
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चरखारी से चुनाव पर बोले, बुंदेलखंड की जनता दिल में
बाद में पत्रकारों के सवाल कि क्या वह चरखारी से चुनाव लड़ेंगे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड की जनता उनके दिल में बसती है। उन्हें निराश नहीं होने दिया जाएगा। सपा ने बुंदेलखंड के लिए बहुत कुछ किया है। आगे भी विकास कार्य होते रहेंगे।
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छह यूनिटों का लोकार्पण, एक का शिलान्यास
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां 105 मेगावाट क्षमता के छह सौर ऊर्जा संयंत्रों का लोकार्पण तथा 20 मेगावॉट क्षमता के एक संयंत्र का शिलान्यास किया। इनमें पांच महोबा तथा एक ललितपुर की है। शिलान्यास की गई परियोजना झांसी के गरौठा में लगेगी। राज्य सरकार ने इसके लिए 148 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था की है।
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अखिलेश की नहीं चली
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- सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने 325 पार्टी प्रत्याशियों की जारी की सूची
- तीन मंत्रियों, 46 विधायकों के कटे टिकट, दूसरी सूची जल्द
- मंत्री गोप, पवन, रामगोविंद का टिकट कटा, एक का क्षेत्र बदला
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लखनऊ : अधिकारों के संग्राम के दौर में समाजवादी पार्टी ने मिशन-2017 के लिए 325 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी की, उससे साफ है कि मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सरकार और शिवपाल यादव को संगठन पर फैसले का अधिकार सौंप रखा है। जिन तीन मंत्रियों व 46 विधायकों का टिकट काटा गया है, उनमें बड़ी संख्या में अखिलेश समर्थक हैं।
मुख्यमंत्री के कोर ग्रुप के कई मंत्रियों का पहली सूची में नाम नहीं है। हालांकि उनकी सीटों पर प्रत्याशी भी घोषित नहीं किए गए हैं। स्पष्ट है कि टिकट बंटवारे के पहले दौर में अखिलेश यादव की नहीं चली जिससे असंतुष्ट यादव ने झांसी में कहा कि वह टिकट पर नेताजी (मुलायम सिंह यादव) से बात करेंगे, उनका संघर्ष जारी रहेगा। लखनऊ लौटने पर देर शाम उन्होंने कई मंत्रियों, विधायकों के साथ आगे की रणनीति पर चिंतन भी किया।
सितंबर से ढाई माह चले समाजवादी परिवार के संग्र्राम में सुलह के बाद से ही टिकट बांटने के अधिकारों को लेकर जोर आजमाइश चल रही थी। प्रदेश अध्यक्ष ने हाल के दिनों में तेजी से प्रत्याशी घोषित करने शुरू किए तो दो दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी पसंद के प्रत्याशियों की सूची मुलायम सिंह यादव को भेजी थी। इसके बाद संग्र्राम की ज्वाला फिर भड़कने के आसार बने। बुधवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अचानक पत्रकारों को बुलाकर 325 सीटों के प्रत्याशी घोषित करते हुए कहा कि वर्ष 2012 में हारी सीटों में से 149 और जीती हुई सीटों में से 176 पर प्रत्याशी घोषित कर रहे हैं। शेष 78 सीटों के प्रत्याशियों पर सर्वे चल रहा है, इन सीटों के प्रत्याशी भी जल्द घोषित होंगे। मुलायम ने कहा कि 403 सीटों के लिए 4200 लोगों ने आवेदन किया था। राष्ट्रीय महासचिव प्रो.राम गोपाल यादव ने आवेदकों का साक्षात्कार लेकर प्रत्याशियों की सूची बनाई है। बची हुई सीटों के लिए भी वह साक्षात्कार व सर्वे कर रहे हैं। कहा कि टिकट काटने से कई लोग नाराज होंगे, इसका उन्हें भी दुख होता है, मगर व्यवस्था के लिए कई बार फैसले लेने पड़ते हैं।
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तीन मंत्रियों के नाम गायब
मुलायम सिंह ने प्रत्याशियों की जो पहली सूची जारी की, उसमें पूर्व प्रदेश महासचिव व ग्र्राम्य विकास मंत्री अरविंद सिंह गोप की रामनगर विधानसभा सीट पर राज्यसभा सदस्य बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश वर्मा को प्रत्याशी बना दिया गया। सपा से निष्कासित होने के बाद भी राज्यमंत्री का ओहदार बरकरार रखने वाले पवन पाण्डेय का भी टिकट काट दिया गया। उनकी अयोध्या सीट पर उनके ही ममेरे भाई आशीष पाण्डेय को प्रत्याशी बना दिया गया। पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के साथ सियासी सफर शुरू करने वाले वरिष्ठ मंत्री राम गोविंद चौधरी का भी टिकट काट दिया गया है। बलिया जिले में उनकी परंपरागत सीट बांसडीह से नीरज सिंह गुड्डू को प्रत्याशी बना दिया गया।
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इनके कटे टिकट
बाराबंकी के रामनगर से विधायक एवं मंत्री अरविंद सिंह गोप, बलिया के बांसडीह से विधायक एवं मंत्री राम गोविंद चौधरी, अयोध्या से विधायक एवं मंत्री पवन पाण्डेय, ठाकुरद्वारा से नवाब जान, मुरादाबाद ग्रामीण से शमीमुलहक, मुरादाबाद शहर से युसूफ अंसारी, बिलारी से मोहम्मद फहीम, धनौरा से मैकल चंद्रा, नौगावा सादात से अशफाक अली खान, डिबाई से भगवान शर्मा, शिकारपुर से मुकेश शर्मा, छर्रा से राकेश सिंह, पटियाली से नजीबा खान जीनत, भोगांव से आलोक कुमार शाक्य, किशनी से बृजेश कठेरिया,बदायूं से आबिद रजा, बहेड़ी से अताउर्रहमान, नवाबगंज से भगवत शरण गंगवार, पूरनपुर से पीतम राम,निघासन से कृष्ण गोपाल पटेल, सिधौली से मनीष रावत, शाहाबाद से बाबू खान, गोपामऊ से श्याम प्रकाश,संडीला से कुंवर महावीर सिंह, मलिहाबाद से इंदल कुमार, सुलतानपुर सदर से अरुण वर्मा, लम्भुआ से संतोष पाण्डेय, कायमगंज से विजय सिंह, दिबियापुर से प्रदीप कुमार, औरैया से मदन सिंह, अकबरपुर रनिया से राम स्वरूप सिंह, घाटमपुर से इंद्रजीत कोरी, जहानाबाद से मैदान गोपाल वर्मा, पट्टी से राम सिंह, मेजा से गिरीश चंद्रा, जैदपुर से राम गोपाल, टांडा से अजीमुलहक पहलवान, आलापुर से भीम प्रसाद, महसी से कृष्ण कुमार ओझा, बलरामपुर से जगराम पासवान,तरबगंज से अवधेश कुमार सिंह, शोहरतगढ़ से लालमुनि सिंह, फरेन्दा से विनोद मणि त्रिपाठी, बरहज से प्रेम प्रकाश सिंह, मेहनगर से बृज लाल सोनकर, बदलापुर से ओमप्रकाश बाबा दूबे और घोरावल से रमेश चंद्रा का टिकट काट दिया गया है।
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अखिलेश जहां से चाहें लड़ें
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विधानसभा चुनाव लडऩे और बुंदेलखंड की कोई सीट चुनने के सवाल पर मुलायम सिंह यादव ने कहा कि वह जहां से चाहें, वहां से चुनाव लड़ सकते हैं। फैसला उनको लेना है। हालांकि इशारा किया कि उनके अभी चुनाव लडऩे की बात नहीं है।
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दो मंत्रियों व एक पूर्व मंत्री का क्षेत्र बदला
समाजवादी पार्टी ने बिल्हौर की विधायक व राज्यमंत्री अरुण कुमार कोरी को रसूलाबाद से प्रत्याशी घोषित किया है जबकि इस सीट से चुनाव लड़ते रहे पूर्व मंत्री शिव कुमार बेरिया को अब बिल्हौर से प्रत्याशी बनाया गया है। इसी तरह गोंडा से चुनाव जीतकर कृषि मंत्री बने विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को पार्टी ने अब तबरगंज विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया है। पंडित सिंह को प्रो.राम गोपाल यादव का बेहद करीबी माना जाता है।
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अखिलेश के करीबी मंत्रियों पर असमंजस
सपा मुखिया द्वारा घोषित पहली सूची में सिर्फ तीन मंत्रियों का टिकट ही नहीं कटा बल्कि दर्जन भर मंत्री इसमें स्थान पाने से वंचित रह गए। इस फैसले ने समाजवादी सियासत में खलबली पैदा कर दी है। टिकट की सूची से नदारद ज्यादातर मंत्रियों को मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता है। मंत्री राम गोविंद चौधरी, अरविंद सिंह गोप और तेज नारायण उर्फ पवन पाण्डेय की सीट पर सपा ने दूसरे उम्मीदवार उतार दिए हैं मगर करीब दर्जन भर मंत्रियों का न तो पहली सूची में नाम घोषित किया गया और न ही वहां दूसरे उम्मीदवार घोषित किए गए। इन मंत्रियों को असमंजस में डाल दिया गया है। खास बात यह कि ये सभी अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं। इनमें खाद्य एवं रसद मंत्री कमाल अख्तर, चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री शिवाकांत ओझा, कर एवं निबंधन मंत्री यासर शाह, कौशल विकास मंत्री अभिषेक मिश्र, गन्ना विकास व चीनी मिल मंत्री नरेन्द्र वर्मा, समाज कल्याण मंत्री शंखलाल मांझी, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री वसीम अहमद, नियोजन एवं ऊर्जा राज्यमंत्री शैलेन्द्र यादव उर्फ ललई, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुधीर कुमार रावत, खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री हेमराज वर्मा और समाज कल्याण राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध को पहली बार टिकट नहीं दिया गया है।
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टिकट की सूची पर शिवपाल की छाया
- पार्टी ड्रामा और कुनबे की कलह के बीच चल रही व्याख्या
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लखनऊ : समाजवादी पार्टी के शूरमा भले यह कहें कि मुलायम सिंह यादव ने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दिया है लेकिन इस सूची पर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव की छाया साफ दिख रही है। कई बार के हेरफेर के बाद भी सूची में ज्यादातर शिवपाल के पसंदीदा उम्मीदवार हैं। सियासी हलकों में पारिवारिक ड्रामा से लेकर कुनबे के कलह के बीच इसकी व्याख्या की जा रही है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह कहा था कि 2017 के चुनाव में परीक्षा उनकी होनी है इसलिए वही उम्मीदवारों का चयन करेंगे। पर इनमें कई ऐसे उम्मीदवार घोषित किए गए जिन्हें वह पार्टी में देखना भी नहीं चाहते थे। अवैध कब्जा और पार्टी विरोधी गतिविधियों के इल्जाम में बाहर किए गए सीतापुर जिले के बिसवां विधायक रामपाल यादव की एक दिन पहले पार्टी में वापसी कराई गई और उनका टिकट भी पक्का कर दिया गया। जाहिर है कि अखिलेश सरकार ने जिस विधायक के कब्जे पर बुलडोजर चलवाकर एक मिसाल कायम करने की पहल की, उसी विधायक की पार्टी में वापसी ने यह मैसेज दे दिया कि सिक्का किसका चल रहा है।
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तीनों मंत्री बने थे शिवपाल की आंख की किरकिरी : प्रदेश सरकार के मंत्री राम गोविंद चौधरी, अरविन्द सिंह गोप और तेज नारायण उर्फ पवन पाण्डेय का टिकट यूं ही नहीं कटा। तीनों शिवपाल की आंख की किरकिरी बन गए थे। पवन पाण्डेय एमएलसी आशु मलिक के साथ अभद्र व्यवहार कर नेताजी की भी निगाहों में चढ़ गए थे। उन्हें पार्टी से बाहर किया गया तो यह उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल से भी हटाए जाएंगे लेकिन अखिलेश ने उन्हें बनाये रखा। इस वजह से भी पहली सूची में उनका टिकट काटकर हैसियत नापने की कोशिश की गई है। खास बात यह कि टिकट भी उनके ही ममेरे भाई को दिया गया है जिनके साथ सियासी प्रतिद्वंद्विता की चर्चा चल पड़ी थी। चाचा-भतीजे की लड़ाई में राम गोविंद चौधरी और गोप मुख्यमंत्री के साथ खुलकर थे। गोप के लिए सबसे बड़ी मुसीबत सांसद और पूर्व मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा बन गए हैं। उनके बेटे को ही गोप की सीट से टिकट मिला है।
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शिवपाल की यारी का बर्खास्त मंत्रियों को इनाम : समाजवादी कुनबे की रार का यह एक नया रूप है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिन मंत्रियों को बर्खास्त किया था उनमें से ज्यादातर मुलायम सिंह यादव की घोषित पहली सूची में टिकट पाने में कामयाब हुए। इसे शिवपाल की यारी निभाने का इनाम माना जा रहा है। बर्खास्त मंत्री नारद राय, अंबिका चौधरी, शादाब फातिमा, ओमप्रकाश सिंह, राजा महेन्द्र अरिदमन सिंह, शिव कुमार बेरिया, योगेश प्रताप सिंह और राजकिशोर सिंह के टिकट घोषित कर दिए गए हैं। शिवपाल सिंह यादव का नाम भी इस सूची में घोषित है। खास बात यह कि राजकिशोर अपने भाई डिंपल को भी टिकट दिलाने में सफल रहे जबकि अरिदमन की पत्नी पक्षालिका सिंह को भी टिकट मिला है।
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बाहुबलियों की गली दाल : अखिलेश यादव ने अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे बाहुबलियों से दूरी बनाने की भले कोशिश की लेकिन दूसरे खेमे ने इसमें बाजी मार ली। ज्यादातर बाहुबलियों और दागियों की दाल गली है। अतीक अहमद का कानपुर कैंट से टिकट बहाल रखा गया है जबकि इलाहाबाद विवाद के बाद उनके टिकट कटने की बात पक्की मानी जा रही थी। बाहुबली मुख्तार अंसारी का टिकट तो नहीं दिया गया लेकिन उनके भाई का सिबगतुल्लाह से टिकट घोषित कर दिया गया है। एनआरएचएम घोटाले के आरोपी कांग्रेस छोड़कर आए विधायक मुकेश श्रीवास्तव भी टिकट पाने में कामयाब रहे।
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अखिलेश के करीबियों का नाम नहीं
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबियों में शुमार लखनऊ उत्तर के विधायक व मंत्री अभिषेक मिश्रा, प्रतापगढ़ के रानीगंज से विधायक व मंत्री शिवाकांत ओझा, अमरोहा सदर से विधायक व मंत्री कमाल अख्तर, बहराइच के मटेरा से विधायक व मंत्री याशर शाह और जौनपुर जिले विधायक व मंत्री ललई यादव को प्रत्याशियों की पहली सूची में नाम नहीं मिला है।
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टिकटों पर मुलायम का फैसला सर्वोपरि: नंदा
मथुरा : समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कहा है कि विधानसभा प्रत्याशियों की सूची पर अध्यक्ष मुलायम ङ्क्षसह क ा फैसला सर्वोपरि है, पार्टी में सूची तो किसी की भी हो सकती है। उन्होंने साफ किया कि सपा चुनाव में कांग्र्रेस सहित किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी।
मुलायम संदेश यात्रा को रवाना करने से पहले नंदा बुधवार को यहां एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सपा प्रदेश की सभी 403 सीटों पर चुनाव लडऩे जा रही है। भाजपा को जनता उसे सबक सिखाएगी। मायावती पर धन के सवाल पर बोले कि यह तो मायावती से ही पूछें कि उन पर इतना धन कहां से आया। अतीक अहमद के बाहुबली होने पर खुलकर बोलने से वे बचते रहे। कहा कि पहले भी उनको टिकट मिल चुका है, इसलिए फिर प्रत्याशी बनाया है। चुनाव में अखिलेश को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने के सवाल पर वरिष्ठ सपा नेता ने कहा कि पार्टी जिसे नेता चुनती है, वही मुख्यमंत्री बनता है।
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