Saturday, 1 July 2017

JUNE POLICE @ CRIME-2017 by PA

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 यूपी में अब कम्युनिटी पुलिंसिंग
-प्रत्येक जिले में एक डिप्टी एसपी नोडल अधिकारी नियुक्त होगा
-अपराधियों के विरुद्ध बिना भेदभाव के पुलिस कार्रवाई करे: मुख्यमंत्री
-यूपी 100 की कार्य प्रणाली को और पारदर्शी बनाया जाएगा
लखनऊ : कानून का राज कायम करने के प्रयासरत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सामान्य पुलिस के साथ 'कम्युनिटी पुलिसिंगÓ पर जोर दिया है। प्रत्येक जिले में एक डिप्टी एसपी को नोडल अधिकारी बनाने का निर्देश दिया है। कानून-व्यवस्था की बेहतरी की दिशा में लापरवाही के दोषी पुलिस कार्मिकों के विरुद्ध जल्द और कठोर कार्रवाई के निर्देश भी दिये हैैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव संकल्प पत्र में कानून का राज स्थापित करने के लिए कम्युनिटी पुलिसिंग का वादा किया थी। जिस पर अमल की दिशा में मुख्यमंत्री ने कदम बढ़ा दिया है। गुरुवार को कालिदास मार्ग स्थित आवास पर मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार, डीजीपी सुलखान सिंह के साथ कानून-व्यवस्था के हाल व आपराधिक वारदातों की विवेचना पर बिन्दुवार समीक्षा की। कहा कि अपराध रोकने के लिए कम्युनिटी पुलिसिंग शुरू की जाए। इसके लिए डिप्टी स्तर के एक अधिकारी को हर जिले में नोडल अधिकारी बनाया जाए। उसे कम्युनिटी पुलिसिंग की समीक्षा, व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जवाबदेह भी बनाया जाए।
मुख्यमंत्री ने पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा कि अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। डायल-यूपी100 को और अधिक चौकस बनाया जाए। जिलों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराये जाएं। इस व्यवस्था की प्रत्येक दिन समीक्षा की जाए। जिलों में एसएसपी डायल-100 की कार्यशैली व उनके रिस्पांस टाइम की समीक्षा कर उसके रिपोर्ट शासन को भेजें। इस व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पेट्रोलिंग बढ़ाकर ढेरों वारदातों को रोका जा सकता है। थाना सड़कों के किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहने वालों का लगातार सत्यापन कराया जाये। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि कानून व्यवस्था दुरुस्त रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है। कानून का राज स्थापित करने के लिए बिना भेदबाव कार्रवाई की जाए।
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क्या है कम्युनिटी पुलिसिंग
अमन पसंद व क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले नागरिकों का समूह गठित किया जाता है। जो पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर गश्त भी करेगा। इस समूह में सभी जाति धर्म, संप्रदाय के लोगों के जिम्मेदार लोगों को शामिल किया जाएगा। हालांकि पहले भी मोहल्ला सुरक्षा समितियां, शांति समितियां गठित हैं जो सौहार्द कायम करने की दिशा में कार्य करती हैैं। मगर कम्प्युटिी पुलिसिंग में कानून व्यवस्था व अपराध नियंत्रण पर कार्य होगा। अब एक डिप्टी एसपी नोडल अधिकारी होगा, इससे अपराध नियंत्रण में कामयाबी मिलने की संभावना है।
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कोट
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक जिलों में कम्प्युनिटी पुलिसिंग शुरू कराई जाएगी। इसके लिए अच्छे और तेज तर्रार पुलिस अधिकारियों की पहचान कर उन्हें नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।-अरविंद कुमार, प्रमुख सचिव गृह
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तीन दारोगा निलंबित, दो होमगार्ड जेल गए, सिपाही लाइन हाजिर

-चौकी इंचार्ज की विदाई में हिस्ट्रीशीटर की मौजूदगी का मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
-मैनपुरी, हाथरस, गोंडा की वारदातों में पुलिस की संलिप्तता पर सरकार सख्त
-पुलिस-अपराधी गठजोड़ खत्म करने को चलाया जाएगा विशेष अभियान
लखनऊ : प्रदेश में कानून का राज कायम करने को प्रयासरत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब 'पुलिस-अपराधीÓ गठजोड़ तोडऩे की दिशा में कदम बढ़ाया है। मथुरा में अपराधी की मौजूदगी मेें समारोह, हाथरस की लूट में पुलिस की संलिप्तता व गोंडा में रोडवेज कर्मियों से मारपीट के इल्जाम में तीन दारोगा निलंबित कर दिये गए। दो होमगार्ड जेल भेजे गए। कई सिपाही लाइन हाजिर किये गये हैैं। मुख्यमंत्री नेे प्रमुख सचिव (गृह), डीजीपी से दो टूक कहा है कि अपराधियों से दोस्ती रखने वाले पुलिस कर्मियों से सक्ती से निपटा जाए।
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद सहारनपुर में जातीय संघर्ष, जेवर (नोएडा) में चार महिलाओं से दुष्कर्म, मथुरा में डकैती-हत्या जैसी वारदातें हुई। जिस पर मुख्यमंत्री ने सख्त रूख अख्तियार किया। अधिकारियों को सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया। सूत्रों का कहना है कि इधर मुख्यमंत्री को भी जानकारी मिली है कि महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कई पुलिस कर्मियों की अपराधियों से साठगांठ है। इसे इत्तिफाक भी कह सकते हैैं कि गत दिनों मथुरा की एक पुलिस चौकी के इंचार्ज के विदाई समारोह में हिस्ट्रीशीटर ने हिस्सा लिया। हाथरस में युगल से पुलिस कर्मियों ने 3.66 लाख रुपए लूट लिए। गोंडा में शराब के नशे में पुलिस कर्मियों द्वारा रोडवेज कर्मचारियों से अभद्रता का इल्जाम लगा। और मैनपुरी में एक दारोगा पर महिला को अश्लील संदेश भेजने का इल्जाम लगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इन प्रकरणों का खुद संज्ञान लिया। प्रमुख सचिव सूचना अवनीश अवस्थी ने यह जानकारी मीडिया से साझा की। कुछ देर बाद मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार, डीजीपी सुलखान सिंह को लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित अपने कार्यालय बुलाया। दोनों अधिकारियों ने बताया कि चौकी प्रभारी के विदाई समारोह में कुछ पत्रकार मौजूद थे, जिनमें से एक हिस्ट्रीशीटर था। इसका संज्ञान लेते हुए चौकी प्रभारी सुभाष चन्द्र बलियान, वरिष्ठ उपनिरीक्षक विनोद तोमर को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। हाथरस में युगल की चेकिंग में दो होमगार्डो ने उनके थैलेसे 2.46 लाख रुपए निकाल लिये थे। दोनों होमगार्डों को जेल भेज दिया गया है। उनके साथ मौजूद रहे पुलिस इंस्पेक्टरों पर कार्रवाई हो रही है। 1.50 लाख रुपए बरामद हो गए हैैं। मैनपुरी में महिला को अश्लील एसएमएस भेजने वाले उपनिरीक्षक राधेरमण को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।  मुख्यमंत्री को बताया गया कि गोंडा में रोडवेज कर्मचारियों के साथ मारपीट की शिकायत सही नहीं मिली है। मगर अभद्रता के मामले में सिपाही लाइन हाजिर कर दिये गये हैैं।
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपराधी-पुलिस गठजोड़ का संजाल खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि सरकार थाने तक सीधी नजर रख रही है। सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि जिन पुलिस कर्मियों की छवि अच्छी नहीं है, उनमें से कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैैं। इन्हें हटाकर ठोस कार्रवाई की जाए।
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कोट
कानून व्यवस्था दुरुस्त रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है, इसमें कोई समझौता नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ सतर्क रहने की हिदायत दी गयी है। अपराधियों के साथ पुलिस कर्मियों की नजदीकी बर्दाश्त नहीं की जाएगा। डीजीपी ने अपराधियों से नजदीकी रखने वाले पुलिस कर्मियों को चिन्हित कराने का अभियान चला रखा है।-अरविंद कुमार, प्रमुख सचिव (गृह)
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झुग्गी-झोपड़ी वालों का डेटा तैयार करेगी पुलिस
-डीजीपी ने पुलिस अधीक्षकों को भेजा निर्देश
लखनऊ : नोएडा के जेवर में चार महिलाओं से दुष्कर्म की वारदात में बाबरिया गिरोह का हाथ होने के संदेह के बाद डीजीपी सुलखान सिंह ने अब झुग्गी-झोपडिय़ो की सघन चेकिंग कर वहां रहने वालों का डेटा तैयार करने का निर्देश दिया है।
एसएसपी, एसपी को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि
बड़े महानगरों में बहुत संख्या में लोग अवैध रूप से झुग्गी झोपड़ी बनाकर रहने लगते हैैं, इनमें से कई अपराधों में लिप्त पाये जाते हैैं। अपराध होने पर इनकी पहचान सत्यापित नहीं हो पाती है। ऐसे लोगों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वालों का सत्यापन कराया जाए। यह भी पता किया जाए कि कहीं कोई छदम नाम, गलत पते पर न रह रहा हो। इनकी सूची तैयार कर थानों में रखी जाए।
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योग दिवस पर अलर्ट
डीजीपी ने पुलिस अधीक्षकों को भेजे निर्देश में यह बी कहा है कि  प्रत्येक वर्ष 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। इस लखनऊ में योगाभ्यास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी शामिल होना है। एक स्थान पर 51 हजार से ज्यादा लोग उनके साथ योग में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रत्येक जिले में योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। जहॉ पर कार्यक्रम होने हों, वहॉ पर प्रवेश एवं निकास की व्यवस्था तथा सुरक्षा चेकिंग की व्यवस्था की जाये। सादे वस्त्रों में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाये। सुबह पांच से 10 बजे तक वाहनों की गहन चेकिंग करायी जाए। जिलाधिकारी के साथ बैठक कर पूरी रूपरेखा तैयार कर ली जाए।
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दो पुलिस क्षेत्राधिकारियों का निलंबन संभव
पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के विरुद्ध दुष्कर्म के मामले की विवेचना में लापरवाही पर शासन सख्त
लखनऊ : नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपित पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के विरुद्ध साक्ष्य जुटाने में शिïिथलता की दोषी सीओ अमिता सिंह व सीओ (अब एएसपी) अवनीश मिश्र के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की तैयारी है। दोनों अधिकारियों को निलंबित भी किया जा सकता है। गृह विभाग ने डीजीपी मुख्यालय से रिपोर्ट तलब की है।
पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति व उनके करीबी पिन्टू सिंह, विकास वर्मा व अन्य लोगों के विरुद्ध दुष्कर्म व पास्को एक्ट की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गौतमपल्ली थाने में दर्ज हुई थी। विवेचना शुरू होते ही पुलिस की कार्यशैली पर ढेरों सवाल उठे थे, मगर तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। पिछले महीने लचर विवेचना का हवाला देकर लखनऊ के अपर जिला जज ने गायत्री प्रजापति को जमानत देने का आदेश किया, तब यह मामला फिर चर्चा में आया। हालांकि हाईकोर्ट ने जमानत आदेश को रद कर दिया और जमानत देने वाले अपर जिला जज की भूमिका जांच शुरू करा दी थी। इस किरकिरी के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लखनऊ के एएसपी (उत्तर) अनुराग वत्स को पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच सौंपी थी। जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में सीओ अमिता सिंह व सीओ अविनाश मिश्र को विवेचना में शिथिलता का दोषी ठहराया है।  विवेचक सीओ अमिता सिंह द्वारा कई स्तर पर गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने मौका मुआयना नहीं किया। नक्शा नजरी तक नहीं बनवाया। वह पीडि़त महिला को साथ लेकर घटनास्थल पर भी नहीं गई थीं। जबकि सीओ अवनीश मिश्रा द्वारा अहम मामले में बिना वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाए केस डायरी कोर्ट मुंशी के पास भेज दिया था। एसएसपी लखनऊ के जरिये डीजीपी मुख्यालय पहुंची इस पर रिपोर्ट वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हतप्रभ हैैं। सूत्रों का कहना है कि गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने डीजीपी मुख्यालय से रिपोर्ट के बारे में जानकारी हासिल की और अब इन दोनों अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई किये जाने के संकेत हैैं।
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जोन से बाहर स्थानांतरित होंगे दारोगा

डीजीपी ने अपराध नियंत्रण के विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों के साथ की चर्चा
लखनऊ : पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुलखान सिंह ने प्रदेश की कानून व्यवस्था चाकचौबंद करने के लिये परम्परागत पुलिसिंग पर जोर दिया है। लंबे समय से जिलों में तैनात उपनिरीक्षकों को जोन के बाहर स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। कम्युनिटी पुलिसिंग को बढ़ावा देने की हिदायत भी थी।
डीजीपी ने सोमवार को जोन में तैनात एडीजी, रेंज में तैनात आइजी, एसएसपी के साथ अपराध नियंत्रण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। कहा कि स्थानान्तरण नियमावली के विरुद्ध जिलों में तैनात उपनिरीक्षकों को जोन के बाहर स्थानांतरित किया जाए। अपराध में शामिल या अपराधियों से संबंध रखने के लिए चिन्हित पुलिस कर्मियों के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। माफिया एवं अन्य प्रभावशाली अपराधियों की सूची बनायी जाए।माफिया के जमानतदारों का सत्यापन कराया जाए।
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चौराहों के 25 मीटर तक ठेले न लगें
गाडिय़ों पर मानक विपरीत लगी नंबर प्लेट, हूटर-सायरन, लाल-नीली बत्तियां, झंडे, तख्तियां हटाने का अभियान चलाया जाए। चालकों को सीट बेल्ट लगाने के लिए प्ररित किया जाए। हेलमेट पहनना सुनिश्चित किया जाए। गाडिय़ों से काली फिल्म हटायी जाएं। यातायात पुलिस चुस्त-दुरूस्त, स्मार्ट वर्दी में रहे । वाहनों से पैसा वसूली की शिकायत पर रोक लगाई जाए। चौराहों से से 25 मीटर ठेले, वाहन न खड़े होने दिये जाएं।
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गोवध पर एनएसए लगाएं
गोवध एवं गोवध के लिए गोवंश के परिवहन पर सख्ती से रोक लगायी जाये। ऐसे अपराधियों के विरूद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, गिरोहबंद अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की जाए। न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों में पैरवी कर परिणाम तक पहुंचा जाए। माफिया व गिरोहबंद अपराधियों की जमानतें निरस्त करायी जाएं। बाजारों, मॉल्स, सार्वजनिक स्थानों, पार्को में सादी वर्दी में महिला सिपाही व अधिकारियों के दस्ते तैनात किये जाएं।
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विवादों का ब्यौरा तैयार करें
क्षेत्र के विवादों को चिन्हित कर उसे रजिस्टर में दर्ज किया जाए। कोशिश इन विवादों को हल कराने की हो। आवश्यकता पडऩे पर निरोधात्मक कार्रवाई की जाए ताकि बलवा, हत्या जैसी वारदात न हो पायें। डीजीपी ने कहा कि अधिकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों की सूची तैयार करें। पांच वर्षों में जमीन,प्लॉट पर कब्जा करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
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आतंकी गतिविधियों पर नजर रखें
डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह भीड़-भाड़ वाले स्थानों की नियमित निगरानी कराई जाए। ताकि कोई आतंकवादी घटना न हो सके। दुकानदारों इत्यादि का सहयोग लिया जाए। संदिग्ध गतिविधि होने पर त्वरित कार्रवाई की जाए। अधिकारी कम्युनिटी पुलिसिंग पर जोर दें। जनसहयोग हासिल करें। स्थानीय सहयोग से सीसीटीवी, चौकीदार का इंतजाम कराया जाए। त्योहारों को बारे में अभीसे अध्ययन कर लिया जाए। विवादित बिन्दु को हल कराया जाये।
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इंसेट
10 से एक कार्यालय पर बैठें
डीजीपी ने पुलिस अधीक्षक,डीआइजी, आइजी, एडीजी जोन को स्पष्ट रूप से कहा कि वह प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक कार्यालय में अवश्य बैठें। कार्यालय के कार्यो का निस्तारण करने के अलावा नागरिकों से मिलकर उनकी शिकायतों का निस्तारण करेंगे। नागरिकों की शिकायतों के निराकरण पर पूरी गंभीरता एवं तत्परता बरती जाये।
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ये हिदायतें भी
-एसपी जवानों के अवकाश, ड्यूटी से विश्राम, भोजन, शौचालय, आवास, चिकित्सा की व्यवस्था तथा परिवार कल्याण की समस्या निराकरण करायें
-थानाध्यक्ष, प्रतिसार निरीक्षक मासिक निरीक्षण, दैनिक मुआयना मालखाना एवं नक्शा नौकरी खुद लिखें
-बन्दियों के एस्कोर्ट के संबंध में बन्दी की प्रकृति के अनुसार स्पष्ट, लिखित आदेश दिया जाए
-कचहरी, लॉक-अप ड्यूटियां जल्दी-जल्दी बदली जाएं
-चरित्र सत्यापन,पासपोर्ट,लाइसेन्स प्रार्थना पत्र पर एक सप्ताह में रिपोर्ट लगा दी जाए।
- एनसीआर की तीन दिन में जांच पूरी हो और सिर्फ आक्रामक पक्ष के विरुद्ध कार्रवाई हो
-टेम्पो,रिक्शा,ऑटो में ओवरलोडिंग रोकी जाए
-गाजियाबाद, नोएडा पुलिस के अधिकारियों को दिल्ली पुलिस के समन्वय बनाकर कार्य करने का निर्देश दिया गया

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स्वास्थ्य, वाणिज्य कर महकमे का बदलेगा आकार
विभागों का विलय होने पर मंत्रियों का कामकाज भी बदलेगा
 लखनऊ : विकास की गाड़ी को रफ्तार से दौड़ाने लिए योगी आदित्यनाथ सरकार नीति आयोग की मंशा केअनुरूप प्रदेश के सरकारी महकमों का विभाग पुर्नगठित करने को तैयार है। की साल पहले स्वास्थ्य विभाग, सेल्स टैक्स (अब वाणिज्य कर), लघु एवं मध्यम उद्योग, औद्योगिक विकास विभागों से अलग गठित विभागों का फिर विलय किया जाएगा। विभागों का विलय होते है, कई मंत्रियों के कामकाज में बदलाव भी तय है।
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंसÓ के मूलमंत्र पर नीति आयोग ने 10 मई को योगी सरकार को विभाग कम करने का सुझाव दिया था। जिस पर सैद्धांतिक सहमति बन गयी थी। इसी के आधार पर नीति आयोग ने राज्य की नुमाइंदगी के साथ संयुक्त वर्किंग ग्र्रुप बनाया था। जिसने जिसने बीमारू कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश केविकास का रोडमैप तैयार किया, इस राह में बड़े विभागों का वर्गीकरण रोड़ा प्रतीत हो रहा है। विकास के लिए विभागों के बीच समन्वय के लिए विभागों का पुर्नगठन किया जाना जरूरी माना गया।
सूत्रों का कहना है कि नीति आयोग ने विकास का जो ब्लू प्रिंट तैयार किया है, उसमें स्वास्थ्य, वाणिज्य कर, बाल विकास एवं महिला कल्याण और लघु एवं मध्यम उद्योगों का विकास शामिल है।
सूत्रों का कहना है कि नीति आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर विभागों के पुर्नगठन का सुझाव दिया है। इस कार्य में मदद का आश्वासन भी दिया गया है। इस समय प्रदेश में तकरीबन 81 विभाग हैैं। सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार नीति आयोग के सुझावों के मुताबिक विभागों के पुर्नगठन की तैयारी में जुट गयी है। परिवार कल्याण विभाग का चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग में विलय करने की तैयारी है। हालांकि अभी दोनों विभागों के एक ही प्रमुख सचिव होते हैैं, मगर मंत्री अलग-अलग हैैं। ऐसे ही वाणिज्य कर विभाग में मनोरंजनकर, आबकारी विभाग का विलय करने का प्रस्ताव है। मुख्य सचिव राहुल भटनागर का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नीति आयोग के सुझावों पर अमल करने की सैद्धांतिक सहमति व्यक्त की है। इस दिशा में नीति आयोग से संवाद बना हुआ है।
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किसका-किसमें विलय संभव
1-रेशम विकास, हैैंडलूम, वस्त्रोद्योग एवं हथकरघा विभाग का सूक्ष्म लघु, एवं मध्यम उद्योग एवं निर्यात प्रोत्सहान विभाग विलय करने की तैयारी है।
2-आबकारी व मनोरंजन कर विभाग  का वाणिज्य कर विभाग में विलय करने का प्रस्ताव है।
3-परिवार कल्याण विभाग का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में विलय करने का प्रस्ताव है। हालांकि अभी दोनों के प्रमुख सचिव एक ही होते हैैं, मगर मंत्री अलग-अलग हैैं।
4-आयुष (आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी सिद्धा) को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में विलय करने की भी योजना है।
5-बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग का महिला कल्याण विभाग में विलय करने का सुझाव भी है।
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मंत्रियों के विभाग भी बदलेंगे
नीति आयोग के सुझावों पर अमल करते हुए अगर सरकार ने विभागों का विलय किया तो परिवार कल्याण, बाल विकास, आबकारी, रेशम, आयुष जैसे विभागों के मंत्रियों के कार्य में भी बदलाव संभव है। अभी इन विभागों के लिए मंत्री, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के मंत्री हैैं। जिन विभागों का विलय होगा, उनके मंत्रियों संबंधित विभाग के प्रशासनिक दायित्व से स्वत: मुक्त हो जाएंगे। ऐसे में मंत्रियों के विभाग में बदलाव के संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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नियम विरुद्ध उपयोग पर ब्लॉक होगा ट्विटर अकाउंट
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गंभीर मामलों में पुलिस करे एफआइआर
लखनऊ : सोशल मीडिया के दुरुयोग को लेकर सरकार चौकन्नी हो गई है। नियमों के विरुद्ध जब कोई भी व्यक्ति अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करेगा, तो उसका अकाउंट ब्लॉक किया जाएगा। गंभीर प्रकरणों में वादी की शिकायत पर पुलिस द्वारा एफआइआर की जाएगी। साइबर नियमों के अनुसार ट्विटर के उपयोग में ऐसा कोई संवाद नहीं किया जा सकता, जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती हो।
पुलिस महानिदेशक कार्यालय में बुधवार को हुई कार्यशाला में ट्विटर टीम की महिमा कौल और रचित उप्पल ने कहा कि ट्विटर प्लेटफार्म पर ङ्क्षहसक धमकियां नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही आतंकवाद को बढ़ावा देना, दुव्र्यहार या उत्पीडऩ करना, लोगों को उकसाना, अपनी प्रोफाइल या हेडर छवि में पोर्नोग्राफिक या बेहद हिंसक मीडिया का उपयोग, दूसरों को लक्ष्य करके किया जाने वाला दुव्र्यवहार प्रतिबंधित है।
कार्यशाला में यह भी कहा गया कि निजी व गोपनीय जानकारी जैसे क्रेडिट कार्ड नम्बर, डाक पता या सोशल सिक्योरिटी का प्रकाशन, आम लोगों को बहकाने, भ्रमिक करने या धोखा देने की मंशा से किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान धारण करना भी गलत है। महिमा कौल ने पुलिसकर्मियों को बताया कि आत्महत्या करने या खुद को नुकसान पहुंचाने के बारे में सूचना मिलने पर लोगों की सहायता करने के लिये कदम उठाया जाये। ध्यान रहे हाल के दिनों में हुई ङ्क्षहसक झड़पों को लेकर अफवाह फैलाने में सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया गया।  सहारनपुर में जातीय ङ्क्षहसा के बाद शासन ने आखिर इंटरनेट सेवाएं ब्लॉक कर दी थीं। भीम आर्मी से जुड़े लोगों ने भी इसके जरिये लोगों की भावनाएं भड़काने का कार्य किया था।
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...मगर वाराणसी जेल में चल रहे मोबाइल फोन
 लखनऊ: कारागारों की सुरक्षा फूलप्रूफ बनाने के लाख दावों के बावजूद वाराणसी जिला कारागार के कुछ अपराधी मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैैं। यह शिकायत आम आदमी की नहीं, आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की है। इस एजेंसी के आइजी ने शासन को पत्र लिखकर जेलों में मोबाइल के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाने को कहा है।
संगठति अपराधियों के विरुद्ध अभियान चलाने वाली एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) हो या आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने कारागारों में मोबाइल फोनों का इस्तेमाल होने की शासन से शिकायत दर्ज कराई। जिस पर कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई भी हुई मगर यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहे हैैं। केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों प्रदेश पर आतंकी खतरे की आशंका जाहिर कर रही हैैं, ऐसे समय में भी जेलों से मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर अंकुश न लगने से सुरक्षा एजेंसियां बेचैन हैैं। सूत्रों का कहना है कि गत दिनों एटीएस के आइजी असीम अरूण ने कारागार व गृह विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर वाराणसी कारागार में इस्तेमाल हो रहे मोबाइल फोनों को तुरंत बंद कराने व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि पूर्वांचल पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई कारागारों में मोबाइल का इस्तेमाल किये जाने की सूचना सुरक्षा एजेंसियों के पास हैैं। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र का कहना है कि जिन जेलों में मोबाइल चलने की शिकायत मिली है, वहां कार्रवाई की जा रही है।
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यूपी हाईअलर्ट पर
त्योहारों के मौसम में प्रदेश में आतंकी खतरे की आशंका के बाद सुरक्षा एजेंसियां न सिर्फ हाई अलर्ट पर हैैं बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के लिए कहा गया है। शासन ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किया है कि संवेदनशील क्षेत्रों में तजुर्बेकार व बेहतर साख वाले अधिकारियों को तैनात किया  जाए। लखनऊ, वाराणसी, आगरा, इलाहाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मथुरा में अतिरिक्त सावधानी बरतने की हिदायत दी गयी है।
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प्रदेश में खुलेंगे 88 बिजली थाने
-ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव को सरकार ने हरी झंडी दिखायी
-लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा में होंगे चार-चार थाने
लखनऊ : बिजली चोरी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने 88 बिजली थाने खोलने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव पर वित्त, गृह, विधायी विभाग ने सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है। इनकी स्थापना के लिए योगी सरकार अपने पहले बजट में धनराशि का इंतजाम करेगी।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर राज्य के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल के साथ बिजली चोरी रोकने के उपायों पर मंथन किया। इस विचार मंथन के दौरान बिजली की चोरी रीकने के लिए  गुजरात मॉडल पर विशेष पुलिस बल की स्थापना पर सहमति बनी थी। इसके आधार पर ऊर्जा विभाग ने 88 बिजली थानों के गठन का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा। इसमें कहा गया है कि मौजूदा समय में बिजली रोकने के लिए 33 प्रवर्तन इकाइयां काम कर रही हैैं जिन्हें थानों में तब्दील करने के साथ 55 और थाने खोले जाएं। यानी बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश में कुल 88 थाने खोले जाने है। इनमें लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, नोएडा, आगरा में चार-चार थाने और बाकी 70 जिलों में एक-एक थाना स्थापित करने का प्रस्ताव है। ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव को सरकार के वित्त, विधायी और गृह विभाग ने सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र का कहना है कि 88 बिजली थाने स्थापित करने का प्रस्ताव मिला है जिस पर शासन स्तर पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। सूत्रों का कहना है कि थानों के लिए आवश्यक मानव संसाधन, गाड़ी, फोन आदि के लिए आवश्यक धनराशि का बजट में इंतजाम किया जाएगा। ध्यान रहे,  बिजली सुधार पर हुई बैठक में कहा गया कि 63 लाख ग्राहकों का रिकार्ड उपलब्ध नहीं है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर बिजली चोरी की शिकायतें हैैं। कई फैक्ट्रियों में बिजली चोरी किये जाने की शिकायतें शासन तक पहुंचती रहती हैैं। थानों की स्थापना से बिजली चोरी रोकने में मदद मिलेगी।
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अवर अभियंता होगा प्रभारी
प्रस्तावित बिजली थाने का प्रभारी ऊर्जा विभाग का अवर अभियंता होगा। थाने में एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर, चार सिपाही, दो लाइन मैन और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात किया जाएगा। थाने का मुख्य कार्य बिजली चोरी रोकना और दोषी लोगों पर कार्रवाई करना होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि थानों के गठन की अधिसूचना होने के बाद यहां तैनात होने वालों के दायित्वों की नियमावली को अंतिम रूप दिया जाए।
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 झुग्गी वालों का उत्पीडऩ न हो: गृह सचिव
 लखनऊ : गृह सचिव मणि प्रसाद ने कहा है कि भूमाफिया के विरुद्ध अभियान के नाम पर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को उत्पीडि़त नहीं किया जाये। संगठित गिरोह बनाकर निजी व सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वालों को भूमाफिया के रूप में चिन्हित कर कार्रवाई की जाए।
सरकार की प्राथमिकता वाले विषयों की समीक्षा के दौरान खुलासा हुआ था कि कई जिलों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को भी भूमाफिया घोषित किया जा रहा है। इस पर तुरंत अंकुश लगाने का शासन ने निर्देश दिया था। गृह सचिव ने कहा कि एंटी भूमाफिया  टास्क फोर्स से संगठित अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा गया है कि सरकारी जमीन के किसी हिस्से में झोपड़ी डाल कर रहने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए मगर उन्हें माफिया नहीं ठहराया जा सकता है। कहा कि इसके लिए सभी जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किया गया है। गृह सचिव ने बताया कि भूमाफिया की सूची तैयार हो रही है, जल्द ही कार्रवाई शुरू होगी।
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हाईटेक होगी सचिवालय की सुरक्षा
-सभी गेट पर लगाये जाएंगे टायर पंक्चर करने वाले उपकरण व बूम बैरियर
-मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सुरक्षा के प्रस्तावों को मिली मंजूरी लखनऊ: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)की सरकार बनने के बाद सचिवालय केभवनों की सुरक्षा के लिए नए सिरे तैयार ब्लू प्रिंट को शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इसके तहत सचिवालय के प्रत्येक गेट पर वाहनों का टायर पंक्चर करने वाले उपकरण व बूम बैरियर लगाये जाएंगे जिससे कि अनधिकृत लोगों का प्रवेश रोका जा सके।
मुख्य सचिव राहुल भटनागर, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार, प्रमुख सचिव सचिवालय प्रशासन की उच्च स्तरीय समिति ने विधानभवन, शास्त्री भवन (एनेक्सी), बापू भवन और मुख्यमंत्री के नये कार्यालय लोकभवन की सुरक्षा के प्रस्ताव पर गुरुवार को चर्चा की। बैठक में तय किया गया है कि सचिवालय भवन के प्रवेश द्वारों पर बॉडी स्कैनर लगाया जाएगा। इलेक्ट्रानिक कार्ड केजरिये परिसर में प्रवेश, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों और कर्मचारियों केलिए बायोमीट्रिक उपस्थिति मशीन लगाने की सिफारिश की गई है। सूत्रों का कहना है कि इसमें सचिवालय के सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाने व उन्हें नए सिरे से प्रशिक्षित करने पर भी चर्चा हुई।
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वॉच टावर भी बनेंगे
 सचिवालय भवनों की सुरक्षा के लिए वॉच टॉवर, स्पॉट लाइट की व्यवस्था भी होगी। हर प्वॉइंट सीसीटीवी की नजर में रहेगा। परिसर में प्रवेश करने वाली गाडिय़ों व व्यक्ति की गतिविधि की इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के जरिये निगरानी होगी। इस व्यवस्था को संचालित करने के लिए नियंत्रण कक्ष और बैगेज एक्स-रे की सुविधा पर सहमति बनी है।
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 बंदी जेल से रच रहे अपराध की साजिश
-पुलिस अधिकारियों ने शासन को लिखा पत्र
-जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने की मांग
 लखनऊ : कानून व्यवस्था पर पुलिस व कारागार महकमे के बीच टकराव के आसार बन रहे हैैं। पुलिस का दावा है कि बहुत बड़ी संख्या में बंदी कारागार के अंदर न सिर्फ मोबाइल फोन बल्कि इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैैं जिसके जरिये अपराध की साजिश रची जा रही है। गृह विभाग ने कारागार महकमे के अधिकारियों को इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र का कहना है कि कारागारों के अंदर मोबाइल व स्मार्टफोन पहुंचने की जांच करायी जा रही है। दोषी लोगों पर कार्रवाई होगी।
  कारागारों की सुरक्षा व्यवस्था को चाकचौबंद बनाने के दावों के बावजूद अपराधी जेल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे हैैं। वसूली मांगी जा रही है। ठेका-पट्टा की बातें हो रही हैं। अपराध का ताना-बाना भी बुना जा रहा है। यूपी एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने साक्ष्यों के साथ इसकी जानकारी शासन को उपलब्ध करायी है। सूत्रों का कहना है कि एडीजी (कानून व्यवस्था) आदित्य मिश्र ने भी शासन को जेलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल से कानून व्यवस्था को चुनौती मिलने की आशंका जाहिर करते हुए इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई के लिए कहा है। ऐसे समय में जब केन्द्रीय खुफिया एजेंसियां आतंकी खतरे की आशंका जाहिर कर रही हैैं, तब भी जेलों से मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर अंकुश न लगने से सुरक्षा एजेंसियां खासी बेचैन हैैं। गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्र का कहना है कि जिन जेलों में मोबाइल चलने की शिकायत मिली है, वहां उच्च अधिकारियों से जांच करायी जा रही है। दोषी लोगों पर शासन सख्त कार्रवाई करेगा। सूत्रों का कहना है कि इससे इतर पुलिस की ओर से बार-बार जेलों में मोबाइल फोन चलने की शिकायत किये जाने से कारागार विभाग के अधिकारी भी खासे खफा है। ऐसे में दोनों महकमों के बीच मतभेद गहराने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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२३
खुफिया रिपोर्ट पर बदले गये 11 जेलों के अधीक्षक

पीएन पांडेय लखनऊ जेल में तैनात
लखनऊ: कारागार में निरुद्ध अपराधियों के धड़ल्ले से मोबाइल इस्तेमाल करने की सुरक्षा एजेंसियों करने की गोपनीय रिपोर्ट से चौकन्ना सरकार ने प्रदेश के 11 संवेदनशील जेलों के वरिष्ठ अधीक्षकों को तबादला कर दिया है।
गृह विभाग के प्रवक्ता के मुताबिक केन्द्रीय कारागार आगरा के वरिष्ठ अधीक्षक एसएचएन रिजवी को मुरादाबाद भेजा गया है। नैनी कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक केदारनाथ को बरेली स्थानांतरित किया गया है। फतेहपुर कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक अरविंद कुमार सिंह को महराजगंज, केन्द्रीय कारागार वाराणसी के वरिष्ठ अधीक्षक संजीव त्रिपाठी को आगरा, केन्द्रीय कारागार बरेली के वरिष्ठ अधीक्षक पीएन पांडेय को लखनऊ जिला कारागार भेजा गया है। मुरादाबाद जिला कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक बीआर वर्मा को नैनी, सहारनपुर कारागार में तैनात चौधरी सेवाराम को बांदा, आदर्श कारागार लखनऊ में तैनात अम्बरीश गौड़ को केन्द्रीय कारागार वाराणसी भेजा गया है। जिला कारागार गोरखपुर के वरिष्ठ अधीक्षक एसके शर्मा को बलरामपुर,  जिला कारागार सुलतानपुर में तैनात वरिष्ठ अधीक्षक प्रमोद कुमार शुक्ला को रायबरेली और  संपूर्णानंद प्रशिक्षण संस्थान में तैनात  राम धनी को गोरखपुर जिला कारागार भेजा गया है। ध्यान रहे, गत दिनों एसटीएफ, एटीएस के अधिकारियों ने शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा था कि जेल बंद अपराधी धडल्ले से मोबाइल फोनों का इस्तेमाल कर रहे हैैं। जिससे कानून व्यवस्था को खतरा हो सकता है। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधीक्षकों का तबादला किया गया है।
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20 जिलों में बनेंगे बाल मित्र थाने
लखनऊ: बच्चों की मदद करने के लिए सरकार ने प्रदेश के 20 जिलों में बाल मित्र थाने स्थापित करने का फैसला लिया था। इसके लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति हो चुकी है। लखनऊ के हजरतगंज थाने से इसकी शुरूआत हो चुकी है।
पुलिस प्रवक्ता राहुल श्रीवास्तव के मुताबिक लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, बरेली के बाल थानों का वहां के अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) को नि नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। गाजीपुर, आगरा, बदायूं, इलाहाबाद,, सोनभद्र, जौनपुर, मीरजापुर, गोरखपुर, गाजियाबाद, बलरामपुर, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, बलिया, मुरादाबाद व बाराबंकी में भी बाल मित्र थानों की स्थापना होनी है। इन थानों के लिए भी नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गयी है।
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