Saturday, 1 July 2017

JUNE -2017 smajwadi party


सपा सदस्यता अभियान की तिथि बढ़ायी
-30 जून तक ली जा सकेगी सदस्यता
लखनऊ : विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद से जनाधार बढ़ाने को प्रयासरत समाजवादी पार्टी ने सदस्यता अभियान की अंतिम तिथि 30 जून कर दी है। पार्टी ने गुरुवार को पूरे प्रदेश में बूथ सदस्यता दिवस बनाया।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 15 अप्रैल को सदस्यता अभियान का आगाज किया था। सदस्यता की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की थी, जिसे 30 जून तक बढ़ा दिया गया है। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि सदस्यता अभियान को विस्तार देने के लिए 15 जून को सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों के बूथों पर सदस्यता अभियान चलाया गया। जिसमें 20 लाख लोगों ने सदस्यता ग्रहण की है। बताया कि कार्यकर्ताओं की मांग पर सदस्यता अंतिम तिथि बढ़ाने का फैसला लिया गया है। चौधरी ने दावा किया कि सपा गांधी, लोहिया, जेपी के विचारों को आगे बढ़ाने में जुटी है। सदस्यता लेने वाले युवा सदस्यों को गांधी व लोहिया को पढऩे के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सपा का महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों एवं पिछड़ों को विशेष अवसर केसिद्धांत में विश्वास है।
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सदस्यता शुल्क 20 रुपये
राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि सदस्यता अभियान के तहत ग्रामसभा, न्याय पंचायत, विकासखंड और वार्ड स्तर पर शिविर लगाए जाएंगे। सदस्यता शुल्क 20 रूपये है। सक्रिय सदस्य होने के लिए 25 अन्य सदस्यों को जोडऩा होता है। सक्रिय सदस्य ही संगठन में पदाधिकारी बन सकेंगे।

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 मुलायम, आजम के बगैर सपा की इफ्तार पार्टी
-अखिलेश यादव ने रोजदारों का इस्तकबाल किया
-प्रमुख दरगाहों, इदारों के उलमा इफ्तार में शामिल हुए
-समाजवादी परिवार का सियासी मतभेद दिलों तक पहुंचा
लखनऊ : कुनबे के महासंग्राम में समाजवादी पार्टी (सपा) से सत्ता फिसली, अब परिवार के सदस्यों के दिलों में भी 'दूरियांÓ बढ़ रही हैैं। 19 जून को मुलायम सिंह, आजम खां और शिवपाल यादव की गैरहाजिरी में सपा की रोजा इफ्तार पार्टी से इस बात को बल मिला है। हालांकि  बड़ी संख्या में मुस्लिम धर्म गुरु, समर्थक इफ्तार में हिस्सा लेने पहुंचे थे। अखिलेश यादव ने रोजदारों का इस्तकबाल किया।
चुनावी साल में समाजवादी कुनबे छिड़ा संग्राम इतना बड़ गया कि मुलायम सिंह ने सिर्फ तीन जनसभाएं की। एक भाई दूसरी बहू और तीसरी एक समर्थक के पक्ष में थी। शिवपाल जसवंतनगर विधानसभा में घिरे रहे। चुनाव परिणाम आने के बाद शिवपाल ने नया दल बनाने का एलान किया। तारीख घोषित की मगर मुलायम के दखल पर उसमें बदलाव कर दिया। इस दौर में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वीकारा कि 'चुनावी हार का एक कारण परिवार की कलह की अतिरिक्त चर्चा रही।Ó ऐसे में सपा 19 जून को रोजा इफ्तार एलान किया तो निगाहें मुलायम पर थीं। सोमवार की सुबह मुलायम दिल्ली में थे, वहां ढेरों नेताओं से मिले। शाम साढ़े छह बजे वह लखनऊ पहुंचे। इफ्तार का समय सात बजकर कुछ मिनट पर था, ऐसे में उम्मीद थी शायद वह इफ्तार पार्टी में आ जाएं मगर वह सीधे विक्रादित्य मार्ग स्थित आवास चले गए। जबकि पिछले साल बहुत बीमार होने के बाद भी इफ्तार पार्टी में गये थे। आजम रामपुर में बने रहे। शिवपाल इफ्तार पार्टी से चंद कदम दूर घर पर रहे। जिससे साफ है कि समाजवादी परिवार में सियासी मतभेद ही नहीं, दिलों में दूरियां बढ़ रही हैैं। ऐसे में अगर शिवपाल यादव का समाजवादी लोकतांत्रिक मोर्चाअस्तित्व में आ जाए तो हैरत नहीं होगी। राजनीति के जानकारों का कहना है कि मोर्चा बना तो सपा के लिए सियासी राह कठिन होगी। दूसरी ओर इफ्तार पार्टी में उपाध्यक्ष किरनमय नंदा, पूर्व मंत्री राजेन्द्र चौधरी, पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी, शायर अनवर जलालपुरी, वसीम बरेलवी, बेनी प्रसाद वर्मा, कां्रग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी, सीपीआइ नेता अतुल अंजान मौजूद थे। हमेशा की तरह लखनऊ के प्रमुख मुस्लिम इदारों, खानखाहों के प्रमुखों ने रोजा इफ्तार में हिस्सा लिया। सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि रोजा इफ्तार पार्टी में तकरीबन 25 हजार लोगों ने शिरकत की। शिया, सुन्नी दोनों संप्रदाय के लोग व धर्म गुरुओं ने इफ्तार पार्टी में हिस्सा लिया। इफ्तार के बाद नमाज में मुल्क की खुशियों व सौहार्य कायम रखने की दुआ मांगी गई।

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ब्यूरो: ...और सपाइ आज चलाएंगे साइकिल

-साइकिल यात्रा के जरिये पर्यावरण की बेहतरी का संदेश देंगे सपाई
-घरों में करें योग फिर अनुशासन में साइकिल यात्रा निकालें: अखिलेश

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : यह भी एक राजनीतिक दांव ही कहा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हजारों नागरिकों के साथ जिस दिन योग करेंगे, उसी दिन यानी बुधवार को सपा समर्थक, कार्यकर्ता साइकिल चलाकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देंगे। योग अभियान की तरह साइकिल चलाने का अभियान भी प्रदेश व्यापी होगा।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दल के जिला, महानगर अध्यक्षों, महामंत्रियों को भेजे निर्देश में कहा है कि पर्यावरण की बेहतरी व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक ता के लिये 21 जून को शहरों, कस्बों व गांव में साइकिल यात्रा निकाली जाए। कार्यकर्ताओं को सुविधा के मुताबिक घरों में व्यायाम व योग करने की इजाजत देने के साथ कहा गया है कि साइकिल चलाने के दौरान अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाए। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि उनकी सरकार ने पर्यावरण बचाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाये थे। लखनऊ में जनेश्वर मिश्र और डॉ. लोहिया पार्क बनाकर यहां के नागरिकों के लिए स्वच्छ हवा का प्रबंध किया था। सभी जिला मुख्यालयों पर हरे-भरे पार्क बनाने की योजना दी थी। पर्यावरण की बेहतरी के लिए लायन सफारी बनायी गयी। अखिलेश यादव ने खुद साइकिल चलाकर नौजवानों को साइकिल चलाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया। कई शहरों में साइकिल ट्रैक बनाये गये थे। चौधरी का कहना है कि साइकिल आम जनता की सवारी है। उससे किसी तरह का प्रदूषण नहीं फैलता है। चौधरी ने कहा कि योग, व्यायाम शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, मगर उसका राजनीतिक फायदा उठाने का प्रयास ठीक नहीं है। योग दिवस पर सपा के कार्यकर्ता प्रदेश के सभी जिलों में साइकिल चलाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देंगे। मगर राजनीतिक विश्लेषक सपा के इस दांव को दूर की राजनीतिक कौड़ी मान रहे हैैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री जब लखनऊ में योग कर रहे होंगे, उसी के आसपास साइकिल यात्रा के जरिये सपा जहां पर्यावरण के प्रति सतर्कता का संदेश देना चाहती है, वहीं समर्थकों को अपने साथ बांधे रखने का प्रयास भी कर रही है।
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मुलायम के वादे पर सपा के रुख का इंतजार
दिल्ली में आज कांग्रेस के साथ चर्चा के बाद अखिलेश खोलेंगे पत्ते
-मुलायम ने भाजपा प्रत्याशी को समर्थन दिया मगर उनके साथ कितने विधायक, सांसद? जवाब मिलना बाकी
लखनऊ : मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रपति पद के भाजपा प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को समर्थन का एलान तो कर दिया, देखने वाली बात यह है कि आखिर उनके साथ कितने विधायक, सांसद हैैं? उनके निर्णय पर समाजवादी पार्टी का रुख क्या रहता है। उम्मीद जतायी जा रही है कि दिल्ली में गुरुवार को कांग्रेस केरणनीतिकारों के साथ चर्चा के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने पत्ते खोलेंगे
 एक जनवरी 2017 को विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम को हटाकर अखिलेश को सपा का अध्यक्ष चुना गया। विधायक, सांसद भी अखिलेश के साथ हो थे। मुलायम की मर्जी के बगैर अखिलेश ने कांग्रेस से चुनावी गठबंधन किया। इस दौर में कई ऐसे मौके आए जब स्पष्ट दिखा कि मुलायम ने जिस दल को बनाया, उसमें ही वह अप्रासंगिक हो गए हैैं। उनकेभाई शिवपाल यादव ने जरूर भाई के सम्मान की दुहाई देकर मोर्चा खड़ा करने का एलान किया। राष्ट्रपति चुनाव की डुगडुगी बजी। केन्द्र सरकार के दो मंत्रियों के अनुरोध पर मुलायम ने एनडीए के साथ जाने का निर्णय सुनाया। फिर रामनाथ कोविंद को अपना दोस्त बताया और मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच कालिदास मार्ग पर डिनर में शामिल हुए। समर्थन दोहराया। यहीं से सवाल उठा कि मुलायम के साथ आखिर कितने विधायक, सांसद हैैं? परिवार में संघर्ष के समय उनके साथ सिर्फ शिवपाल यादव बचे थे। आजम भी तटस्थ हो गए थे। नियम के हिसाब से सपा में वह संरक्षक पद पर हैैं, जिसका पार्टी के संविधान में कोई महत्व नहीं है। ऐसे उनके समर्थन का एलान माने सिर्फ खुद के वोट से है। या उनके पुत्र व सपा अध्यक्ष अखिलेश उनकी घोषणा के समर्थन में खड़े होंगे? यह देखने वाली बात होगी। सपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव मुलायम सिंह की घोषणा के समर्थन में जा सकते है। तर्क यह है कि अखिलेश राजनीतिक समीकरण भाजपा उम्मीदवार रामनाथ गोविंद के पक्ष में है। सपा के विरोध से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। ऐसे में अखिलेश इस बहाने परिवार के अंदर चल रही कलह को कुछ हद तक थामने का प्रयास कर सकते हैैं। सूत्रों का कहना है कि 22 जून को दिल्ली में कांग्रेस के रणनीतिकारों के साथ चुनावी स्थितियों पर मंथन के बाद ही सपा अध्यक्ष कोई फैसला लेंगे। सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि सपा भाजपा की फासिस्ट नीतियों का विरोध करती आयी है, अगर विपक्ष एकजुट होकर कोई फैसला लेता है, तो हम उसके साथ रहना पसंद करेंगे।
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15 june
 पूर्व मंत्री वकार की पेंशन पर विचार करें विस अध्यक्ष : राज्यपाल
- शिकायती पत्र का राम नाईक ने किया निस्तारण
- भारत निर्वाचन आयोग के अभिमत से पारित किया आदेश
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लखनऊ : राज्यपाल राम नाईक ने 16वीं विधानसभा के सदस्य व पूर्व मंत्री वकार अहमद शाह के खिलाफ हुई शिकायत का चुनाव आयोग के अभिमत के अनुसार निस्तारण कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने वकार के खिलाफ शिकायत की थी। राज्यपाल ने विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को पत्र भेजकर वकार को मिलने वाली पेंशन पर विचार करने को कहा है।
राज्यपाल ने 'भारत का संविधानÓ के अनुच्छेद 192(एक) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कर भारत निर्वाचन आयोग के मतानुसार वकार अहमद शाह के खिलाफ नूतन ठाकुर के शिकायती पत्र का निस्तारण कर दिया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को प्रेषित पत्र में कहा है कि वकार मौजूदा विधानसभा के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उनको नियमानुसार अनुमन्य पेंशन एवं अन्य देयों का भुगतान यथाशीघ्र करने पर विचार किया जाए। नूतन ने 19 मई, 2015 को अपने शिकायती पत्र में कहा था कि वकार अहमद शाह दो वर्ष से कोमा में हैं। मानसिक रूप से अस्वस्थ हो चुके हैं, जिसके कारण वह विधानसभा की बैठकों में शामिल भी नहीं हुए हैं। नूतन ने इस आधार पर वकार की विधानसभा की सदस्यता निरस्त करने का अनुरोध किया था। राज्यपाल ने शिकायती पत्र को संविधान एवं उच्चतम न्यायालय के सिद्धांतों के आधार पर भारत निर्वाचन आयोग के अभिमत हेतु 23 नवंबर, 2015 को प्रेषित किया। इसका उत्तर राज्यपाल को एक वर्ष छह माह बाद 23 मई, 2017 को प्राप्त हुआ। निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में कहा कि वकार अहमद शाह के मानसिक अस्वस्थ होने के संबंध में आयोग के समक्ष किसी सक्षम स्तर पर प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया है। मार्च, 2017 में 17वीं विधानसभा के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। वकार पुन: विधानसभा के सदस्य निर्वाचित नहीं हुए हैं। ऐसे में बहराइच विधानसभा क्षेत्र से 2012 में निर्वाचित 16वीं विधानसभा के सदस्य वकार के विरुद्ध डॉ. नूतन का शिकायती प्रत्यावेदन निष्फल हो गया है। राज्यपाल ने अपने आदेश की प्रति भारत निर्वाचन आयोग, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, गजट के लिए मुख्यसचिव और वकार शाह के परिजनों प्रमुख सचिव विधानसभा द्वारा तथा नूतन को प्रेषित की है। कानून के जानकारों का कहना है कि चुनाव आयोग ने ठाकुर के की शिकायत को यह कहकर खारिज किया कि 'अब वह सदस्यÓ नहीं है। मगर जिस कार्यकाल की शिकायत की शिकायत थी, उसका अभिमत क्यों नहीं दिया, इस पर सवाल उठाये जा रहे हैैं। सूत्रों का कहना है कि किसी पूर्व सदस्य को पेंशन के लिए प्रमाण पत्र देना होता है और कोमा में रहने वाला व्यक्ति प्रमाण पत्र कैसे दे सकता है? यह वह बिन्दु है जिसके आधार पर पेंशन पर विचार करने को कहा गया है।
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