-6 दिसंबर को अपट्रान पावर ट्रानिक्स को कार्य देने का प्रस्ताव बना, उसी दिन निदेशालय, शासन के सेक्शन, अनुसचिव और अपर मुख्य सचिव आयुष ने दी मंजूरी
-7 दिसम्बर को ही आयुष मंत्री ने मंजूरी दी, उसी दिन आदेश आयुर्वेद
निदेशालय पहुंच गया और कार्य आवंटन आदेश भी जारी हो गया
-और ये सारा कार्य एक फर्जी लेटर हेड पर हुआ था, एसटीएफ के आरोप में ये
सारी बातें दर्ज हैं
-फिर भी अपर मुख्य सचिव को सीधे आरोपी नहीं बनाया गया, अब सीबीआई ढंढूगी
खामियां
परवेज़ अहमद
लखनऊ। राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा( नीट 2021-22 सत्र) के जरिये
बीएएमएस, बीयूएमएस और बीचएमएस में दाखिले की काउंसिलिंग एजेंसी के निर्धारण व उसकी
दरे ( पैसा) निर्धारित करने में फर्जी, कूटरचित लेटर हेड का इस्तेमाल किया गया। यह
फर्जी पत्र ने कुछ घंटों के अंदर ही अपट्रान पावर ट्रानिक्स से आयुर्वेद निदेशालय,
लिपिक, निदेशक, शासन के सेक्शन अधिकारी, अनुसचिव की मंजूरी ही हासिल नहीं की बल्कि
अपर मुख्य सचिव आयुष प्रशांत त्रिवेदी की सकारात्मक टिप्पणी भी हासिल कर ली और
अगली तारीख लगते ही पत्र पर मंत्री डॉ.धर्म सिंह सैनी की स्वीकृति हो गयी और इसी
दिन निदेशक ने पूर्ववर्ती दरों पर नीट काउंसिलिंग का कार्य अपट्रान पावर ट्रानिक्स
को आवंटित करने का आदेश जारी कर दिया। यानी ये सारा कार्य बुलेट ट्रेन की रफ्तार
से हुआ। एसटीएफ (स्पेशल टॉस्क फोर्स ) के विवेचनाधिकारियों ने तकनीकी, वैज्ञानिक
साक्ष्यों के साथ ये सब उल्लेख किया मगर शीर्ष अधिकारी को सीधे आरोपी नहीं बनाया।
क्यों ? सीबीआई की
विवेचना में शायद इसका उत्तर मिल सके।
आरोप पत्र में एसटीएफ के विवेचनाधिकारी संजीव कुमार दीक्षित ने एक स्थान पर
उल्लेख किया गया है कि शासन से प्राप्त टेंडर डिटेल के अवलोकन में पाया गया कि
अपट्रान पावर ट्रानिक्स लिमिटेड के लेटर पैड संख्या -1093 रिफरेंस नम्बर
यूपीएल-202122-886 जो निदेशक आयुर्वेद को तकनीकी सलाहकार रूपेश श्रीवास्तव ने भेजा
था, उस पर हस्ताक्षर शिवम श्रीवास्तव के थे। इसी आदेश को आयुर्वेद विभाग के निदेशक
प्रो.एसएन सिंह ने पत्रांक संख्या-1244-शिक्षा-2432-2021
(नीट 2021) 6 दिसम्बर 2012 को ही अपर मुख्य सचिव आयुष ( प्रशांत त्रिवेदी तैनात
थे) को लिखा, इसमें पूर्ववर्ती दरों पर ही अपट्रान पावर ट्रानिक्स को कार्य आवंटित
करने के लिए कहा गया था। इसी तिथि यानी 6 दिसम्बर को ही अनुसचिव ने भी सकारात्मक
टिप्पणी लिख थी और उसी दिन अपर मुख्य सचिव ने भी अपनी टिप्पणी प्रेषित कर दी। और
अगले दिन यानी 7 दिसम्बर 2021 को तत्कालीन मंत्री डॉ.धर्म सिंह सैनी का अनुमोदन हो
गया और इसी दिन यानी 7 दिसम्बर को ही अपट्रान पावर ट्रानिक्स को कार्य आवंटित करने
का आदेश भी जारी कर दिया गया।
एसटीएफ ने आरोप पत्र में लिखा है कि पूछताछ में रूपेश कुमार ने बताया कि
उनके द्वारा लेटर पैड संख्या-1091 दिनांक सात दिसम्बर 2021 को निदेशक के लिये जारी
किया गया था। जिससे साफ है कि फर्जी एवं कूटरचित पत्र पर टेंडर आवंटित कर दिया
गया। विवेचनाधिकारी ने अदालत में दाखिल विवेचना के परचा नम्बर 11 में सारा ब्यौरा
दर्ज किया है।
किस-किस के खिलाफ चार्जशीट
1-सत्य नारायण सिंह, निवासी कहलो गार्डेन सिटी वृंदावन कालोनी, लखनऊ
2- डॉ. उमाकांत, निलंबित प्रभारी अधिकारी शिक्षा आयुर्वेद निदेशालय
3- राजेश सिंह, वरिष्ठ सहायक आयुर्वेद निदेशालय
4-कैलाश चन्द्र भाष्कार, कनिष्ठ सहायक आयुर्वेद निदेशालय
5- कुलदीप सिंह वर्मा, बिचौलिया, आउटसोर्सिंग कंपनी कर्मी
6- प्रबोध सिंह, एजीएम अपट्रान पावर ट्रानिक्स लिमिटेड
7-रूपेश रंजन पांडेय, पार्टनर रिमार्क टेक्नोलॉजी लिमिटेड
8-इन्द्र देव मिश्र, पार्टनर रिमार्क टेक्नोलॉजी लिमिटेड
9-सौरभ मौर्य ( मौर्च) निदेशक, टेक्नोओशियन आईटी साल्यूशन
10-हर्षवर्धन तिवारी उर्फ सोनल डायरेक्टर टेक्नोओशिवान आईटी साल्युशन
11-गौरव कुमार गुमा डायरेक्टर वी-3 साफ्ट साल्युसन प्रा.लि.
12-रूपेश श्रीवास्तव, तकनीकी सहायक, अपट्रान पावर ट्रानिक्स लिमिटेड
प्राइवेट व्यक्ति
विजय यादव, धर्मेन्द्र यादव,
निवासीबरईपुर सारनाथ वरुणा वाराणसी और आलोक तिवारी मडियांव लखनऊ।
गवाह
एसटीएफ ने दो स्तर के गवाह बनाये हैं। सीधे गवाह के रूप में 12 लोगों का
नाम दर्ज है और अन्य गवाह के रूप में 13 लोगों का नाम दर्ज है। इस मामले के विवेचनाधिकारियों
को साक्षी और गवाह के रूप में दर्ज किया
गया है। इसमें एक डिप्टी एसपी, इंस्पेक्टर , सब इंस्पेक्टर व सिपाही शामिल हैं।
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